धीरेंद्र उपाध्याय
मुंबई का जेजे अस्पताल पैथोलॉजी गठजोड़ और लंबे एमआरआई इंतजार से जूझ रहा है। भायखला स्थित राज्य का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है, जिससे प्रतिदिन हजारों मरीज प्रभावित हो रहे हैं।
अस्पताल पर बोझ
भायखला स्थित जेजे अस्पताल, जिसमें १,३५२ बिस्तर हैं, राज्य का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल है, कई चुनौतियों से जूझ रहा है, जिससे हर दिन हजारों मरीज प्रभावित हो रहे हैं। रोजाना औसतन ४,५००-५,००० ओपीडी मामलों को संभालने के बावजूद, बुनियादी ढांचे के विकास में देरी और संचालन संबंधी कमियां मरीजों की परेशानियों को और बढ़ा रही हैं।
ऑनलाइन पेमेंट!
यहां पर इलाज कर चुके एक मरीज रामदास ने बताया कि अस्पताल में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने के कारण उनके मित्र के परिवार को बाहर से दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा था। जो दवाइयां उन्हें अस्पताल में हजार की मिल सकती थीं उसके लिए उन्हें दुगने पैसे प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर खर्च करने पड़े।
भीड़भाड़ का असर
जेजे अस्पताल में राज्यभर से और पड़ोसी राज्यों से भी मरीज आते हैं। हालांकि, अस्पताल को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो मरीजों की देखभाल को प्रभावित करती हैं, जिनमें भीड़भाड़, कर्मचारियों की कमी और बुनियादी ढांचे की समस्याएं शामिल हैं।
निर्माण में देरी, बढ़ती लागत
नए अस्पताल का निर्माण २०१९ में शुरू हुआ था। हालांकि, अभी तक एक भी विंग पूरा नहीं हुआ है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक असुविधा होने की चिंता बढ़ गई है। नए अस्पताल परियोजना की लागत के प्रारंभिक बजट ४०७.१६ करोड़ रुपए से संशोधित कर ७७८.७५ करोड़ रुपए कर दिया गया है। कर्मचारियों की भारी कमी
जेजे अस्पताल में वर्तमान में अकेले वार्ड बॉय के ४०० के करीब पद रिक्त हैं। अस्पताल के कर्मचारी संगठन के मुताबिक, मौजूदा स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यूनियन इन पदों को ठेका कर्मचारियों के बजाय स्थायी कर्मचारियों से भरने की मांग कर रही है।
अस्पताल में ६० से ज्यादा विभागों में लगभग ४०० रेजिडेंट डॉक्टर कार्यरत हैं। हालांकि, एक आरटीआई से पता चला है कि डॉक्टरों की उपस्थिति में काफी अंतर है। आंकड़ों के अनुसार, २०२१ में नियुक्त एक एसोसिएट प्रोफेसर ने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। यहां तक कि बड़ी संख्या में डॉक्टर या तो अनुपस्थित रहते हैं या अस्पताल में देरी से आने की सूचना देते हैं।
कथित सांठ-गांठ
सर जेजे अस्पताल के सूत्र बताते हैं कि निजी पैथोलॉजी लैब के कलेक्शन एजेंट अक्सर बड़ी संख्या में मेडिकल स्टोर के आस-पास घूमते देखे जाते हैं और टेस्ट स्लिप लेकर आनेवाले मरीजों के परिजनों को निशाना बनाते हैं। इसकी वजह अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की एजेंट से मिलीभगत हो सकती है।
गौरतलब है कि सर जेजे अस्पताल के डीन द्वारा १८ जून, २०२५ को जारी एक परिपत्र में इस चिंता को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया गया, जिसमें सभी विभाग प्रमुखों को ‘नो प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी’ लागू करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि मरीजों को परीक्षण के लिए बाहरी प्रयोगशालाओं में न भेजा जाए।
पुरानी मशीनों के कारण एमआरआई में देरी
एक और गंभीर चिंता एमआरआई स्वैâन के लिए लंबा इंतजार है। वर्तमान में, जेजे अस्पताल में मरीजों को एमआरआई के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ता है। हालांकि, यह मनपा द्वारा संचालित अस्पतालों में प्रतीक्षा समय से कम है। अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल में दो एमआरआई मशीनें हैं, जिनमें से एक १३ साल से ज्यादा पुरानी है और बार-बार खराब हो जाती है।
