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तहकीकात : बेटियों की सुरक्षा भाषणों और पोस्टरों तक सीमित… सात महीने में ४०० बच्चियों से रेप!

-फिरोज खान

महाराष्ट्र में बेटियों की सुरक्षा के दावों के बीच मासूम बच्चियों के खिलाफ दरिंदगी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के सामने महिला सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाडली बहन’ जैसी योजनाओं के प्रचार के बीच सवाल है कि आखिर बेटियां सुरक्षित कब होंगी। हकीकत यह है कि महिलाओं व बच्चियों की इज्जत सिर्फ भाषणों और पोस्टरों तक सिमित रह गई है। नई मुंबई के तुर्भे में नौ साल की पांचवीं कक्षा की छात्रा की यौन उत्पीड़न के बाद हत्या की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। बच्ची शनिवार को खेलने निकली थी, लेकिन घर नहीं लौटी। तलाश के बाद उसका शव पावने एमआईडीसी के जंगल क्षेत्र में मिला। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से ३० वर्षीय पड़ोसी को गिरफ्तार किया। मुंबई पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, ३१ जुलाई २०२६ तक शहर में नाबालिग लड़कियों से बलात्कार के ४०० मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ३६४ मामले सामने आए थे। कुल बलात्कार के मामले भी बढ़कर ७४१ हो गए, जो २०२५ की समान अवधि में ७१० थे। ये आंकड़े महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
कई मासूम बनीं दरिंदगी का शिकार
जुलाई में दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके में आठ साल की बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में एक सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार किया गया। मई में पुणे जिले के नसरापुर में साढ़े तीन साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या की घटना ने महाराष्ट्र को झकझोर दिया था।
पोस्टरों से नहीं, जमीन पर दिखे सुरक्षा
हर गंभीर घटना के बाद जांच और सख्त कार्रवाई के आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन अपराध रोकने के लिए पुलिस की गश्त, स्कूलों के आसपास सुरक्षा, त्वरित जांच और दोषियों को समय पर सजा दिलाने की व्यवस्था प्रभावी नजर नहीं आती है।

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