फिरोज खान
‘डिजिटल रेप’ की घटनाएं दिनों दिन बढ़ती ही जा रही हैं। इस तरह के रेप मामले में ज्यादातर नाबालिग बच्चियां शिकार हो रही हैं। छोटी उम्र होने की वजह से लड़कियां सामने वाले शख्स की गंदी हरकतों को समझ नहीं पाती हैं और शिकार बन जाती हैं। यह हमला किसी भी जगह पर हो सकता है। ऐसा नहीं, कि डिजिटल रेप में सिर्फ नाबालिग बच्चियां ही फंसती हैंैं। बड़ी उम्र की औरते भी जाने अंजाने में आरोपी के जाल में जकड़ जाती हैं।अक्सर इस तरह के मामले की रिपोर्ट नहीं होती हैं, क्योंकि परिवार को बदनामी का डर होता है। यही वजह है कि माता-पिता यह सोच कर चुप रह जाते है, लेकिन सच ये है कि डिजिटल रेप भी रेप ही होता है डिजिटल रेप एक गंभीर यौन अपराध है. डिजिटल शब्द की वजह से कई लोगों को लगता है कि यह किसी ऑनलाइन गतिविधि से जुड़ा अपराध है, लेकिन असल में इसका मतलब कुछ और ही है। महाराष्ट्र के नाशिक और सोलापुर में एक ६ साल और ४ साल की बच्ची के साथ डिजिटल रेप हुआ। इसी साल जनवरी में राम मंदिर रेलवे स्टेशन इलाके में युवती बेहोशी की हालत में मिली थी। उसका यौन उत्पीड़न किया गया था। उस पर सिजेरियन ब्लेड से भी हमला किया गया। हरियाणा के गुरुग्राम के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में एक ४६ साल की एयरहोस्टेस को एडमिट किया गया था । ट्रेनिंग के दौरन स्विमिंग पूल में डूबने की वजह से उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई थी। उसको आईसीयू में रखा गया। करीब एक हफ्ते बाद जब वो डिस्चार्ज होने के बाद घर में आई तो उसने अपने पति को बताया कि आईसीयू में उसके साथ डिजिटल रेप हुआ है। दिल्लीr में दो साल की बच्ची के साथ डिजिटल रेप हुआ। यह घटना २० अक्टूबर को हुई थी। इस मामले में एक ३० वर्षीय व्यक्ति को ९ दिनों के भीतर दोषी ठहराया गया और उसे २५ साल की कड़ी वैâद की सजा सुनाई।
इस तरह के गंभीर विषय पर एडवोकेट डा. सयद एजाज़ अब्बास नकवी से बात की गई तो उन्होंने बताया साल २०१३ के बाद डिजिटल रेप पर सख्त कानून बना। डिजिटल रेप में ज्यादातर नाबालिग बच्चियां शिकार बनती हैं, क्योंकि कि वे इस बात से बेखबर रहती हैं कि उनके साथ क्या हो रहा है, इसी नासमझी का फायदा उठाकर आरोपी गंदी हरकतें करता है। एडवोकेट नकवी ने बताया बच्ची हो या महिला किसी के भी प्राइवेट पार्ट में कोई किसी तरह की छेड़खानी करता है तो वह डिजिटल रेप कहलाता है और इस तरह के अपराध को अन्य रेप की श्रेणी में रखा गया है। समाज सेविका अंजना यादव का कहना है कि इस तरह की हरकतें ज्यादातर जान पहचान वाले ही करते हैं। छोटी उम्र की लड़कियों को दरिंदे अपने भरोसे में लेते हैं और उनके साथ घिनौनी हरकत करते हैं। अंजना के मुताबिक इस तरह की घटनाएं शहर के निस्बत ग्रामीण इलाकों में ज्यादातर होती है। अधिकतर लोगों को यह भी पता नहीं कि प्राइवेट पार्ट से छेड़खानी करने पर बलात्कार का केस बनता है, इसलिए इस तरह के मामले यूं ही नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।
क्या होता डिजिटल रेप?
डिजिटल का मतलब यहां टेक्नोलॉजी से नहीं, डिजिटल यानी उंगली या किसी चीज से है। अगर किसी महिला या बच्ची के प्राइवेट पार्ट्स में जबरदस्तीr हाथ से छेड़खानी करता है या कोई ऑब्जेक्ट डाला जाए तो डिजिटल रेप कहते हैं। किसी पीड़िता को जबरदस्ती यौन गतिविधि में शामिल करना भी डिजिटल रेप के अंतर्गत आता है। बिना अनुमति किसी की निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करना भी डिजिटल यौन उत्पीड़न है। अब बात करते हैं डिजिटल रेप की सजा की । ये शब्द जेंडर न्यूट्रल है। मतलब पीड़िता या आरोपी किसी भी लिंग का हो सकता है।
