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निवेश गुरु : उल्टा-पुल्टा निवेश… सोच को सीधा कीजिए

भरतकुमार सोलंकी
मुंबई

क्या आपने कभी गौर किया है कि हम निवेश करते समय अकसर अपनी सोच का उल्टा इस्तेमाल करते हैं? जब किसी को ब्याज पर पैसा देना होता है, तो हमारी मानसिकता बड़ी स्पष्ट होती है- ‘बस ३ महीने, ६ महीने या ज्यादा से ज्यादा एक साल!’ लेकिन जब बात बिजनेस पार्टनरशिप की आती है, तो हम उम्मीद रखते हैं कि यह जीवन भर चलेगी- साथ चलनेवाला साथी मुनाफा बढ़े और रिश्ते मजबूत हों। अब जरा आज के निवेशक की आदतों पर नजर डालिए – जो उत्पाद लॉन्ग टर्म के लिए बनाए गए हैं जैसे यूलिप, जिसमें इंश्योरेंस भी हैं, निवेश भी और टैक्स बचत भी, उसे लोग ३-५ साल के अंदर तोड़कर वापस ले आते हैं। जबकि जो उत्पाद केवल गारंटीड ब्याज देने के लिए बने हैं, जैसे ट्रेडिशनल पॉलिसियां (जिनका मकसद शॉर्ट टर्म सेविंग्स और रिस्क प्रâी पैसा है), उसमें लोग १५-२५ साल तक प्रीमियम भरते रहते हैं।
यूलिप असल में इक्विटी आधारित योजना होती है, जिसमें निवेशकों का पैसा कंपनियों के शेयरों में लगाया जाता है और शेयर का मतलब है – धंधे में भागीदारी। आप जब यूलिप खरीदते हैं, तो आप सीधे तौर पर भारत के उद्योग जगत में साझेदार बनते हैं। सोचिए, क्या कोई अपने साझेदारी वाले बिजनेस को दो-चार साल में ही बेचकर निकलने की सोचता है? धंधा और धंधे में भागीदारी का रिश्ता तो जिंदगी भर निभाने का होता है – तभी तो वह आपको असली मुनाफा देता है। फिर यूलिप जैसी योजनाओं को भी उसी सोच के साथ क्यों नहीं लिया जाता?
सोचिए जरा, जिन योजनाओं को लंबे समय के लिए पकाना था, उन्हें हम कच्चा निकाल रहे हैं और जिन्हें जल्दी पकाना था, उन्हें धीमी आंच पर जलने दे रहे हैं! यही तो हैं ‘उल्टा-पुल्टा’ निवेश।
यूलिप जैसे प्रोडक्ट १५ या २० साल की योजना के लिए बने हैं, जहां कंपाउंडिंग और मार्वेâट का लाभ धीरे-धीरे आता है। तीन साल में इनका फायदा दिखे यह सोचना वैसा ही हैं जैसे कि आम के पेड़ से एक साल में फल की उम्मीद करना। वहीं दूसरी तरफ ट्रेडिशनल पॉलिसी जिनका रिटर्न ही तय होता है (और वह भी अक्सर महंगाई से कम), उनमें सालों तक पैसा भरना किसी ठहरे हुए पानी में नाव चलाने जैसा है- न गति, न गहराई।
इसलिए अब वक्त आ गया है कि हम अपने निवेश की सोच को सीधा करें। लॉन्ग टर्म प्रोडक्ट्स को लंबी अवधि के लिए रखें और शॉर्ट टर्म प्रोडक्ट्स को तात्कालिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल करें। अगर हम अपने बिजनेस पार्टनर को उम्रभर निभाने की सोच रखते हैं, तो अपने मनी पार्टनर (इन्वेस्टमेंट) के साथ भी उतनी ही समझदारी क्यों नहीं दिखाते? याद रखिए, सोच अगर उल्टी होगी तो परिणाम भी उल्टे ही मिलेंगे।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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