मुख्यपृष्ठस्तंभनिवेश गुरु: महंगाई से लड़ना है तो क्या सिर्फ शिकायत काफी है?

निवेश गुरु: महंगाई से लड़ना है तो क्या सिर्फ शिकायत काफी है?

भरतकुमार सोलंकी / मुंबई

दुनिया तेजी से बदल रही है। कहीं युद्ध का माहौल है, कहीं कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है, कहीं सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और कहीं सरकारें महंगाई को नियंत्रित करने के लिए बाजार से नकदी खींचने की नीतियां अपना रही हैं। ऐसे वैश्विक वातावरण का असर आखिर आम आदमी की जेब पर ही पड़ता है। सवाल यह है कि जब महंगाई बढ़ रही हो तो उससे लड़ने का तरीका क्या है?
क्या सरकार को कोसने से महंगाई कम हो जाएगी? क्या अखबार पढ़कर या टीवी पर बहस देखकर हमारी क्रय शक्ति बढ़ जाएगी? शायद नहीं। महंगाई से लड़ने के लिए वास्तव में केवल दो ही रास्ते हैं-पहला, अपनी कमाई बढ़ाना और दूसरा, अपने खर्चों को नियंत्रित करना। लेकिन क्या इतना ही काफी है? यदि आपकी आय १० प्रतिशत बढ़े और महंगाई भी १० प्रतिशत बढ़ जाए तो आप वहीं के वहीं खड़े रहेंगे। इसलिए तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कदम है-निवेश। जरा सोचिए, यदि दस वर्ष पहले किसी व्यक्ति का मासिक खर्च २५ हजार रुपए था और उसने यह सोचकर कोई निवेश नहीं किया कि अभी तो सब ठीक चल रहा है, तो आज वही खर्च ५० हजार रुपए या उससे अधिक हो सकता है। सवाल यह है कि क्या उसकी आय भी उसी अनुपात में बढ़ी है? और यदि नहीं बढ़ी तो वह अंतर वैâसे पूरा होगा?
यही कारण है कि निवेश कोई विलासिता नहीं, बल्कि आवश्यकता है। अक्सर लोग बचत और निवेश को एक ही समझ लेते हैं। बैंक खाते में पैसा पड़ा रहना बचत हो सकती है, लेकिन वह हमेशा निवेश नहीं होता। क्योंकि महंगाई लगातार आपकी क्रय शक्ति को कम करती रहती है। यदि आपका पैसा महंगाई से तेज गति से नहीं बढ़ रहा है तो वास्तव में आपकी संपत्ति बढ़ नहीं रही, बल्कि घट रही है। एक और सवाल पूछिए स्वयं से-क्या आपने कभी अपने परिवार का भविष्य खर्चों की भाषा में सोचा है? बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, रिटायरमेंट, मकान की मरम्मत, बढ़ती चिकित्सा लागत-क्या ये सभी भविष्य के खर्च नहीं हैं? और यदि हैं, तो क्या इनके लिए अलग से निवेश योजना बनाई गई है?
बड़ी कंपनियां भी बढ़ती लागत और महंगाई से बचने के लिए अपनी पूंजी को निष्क्रिय नहीं रखतीं। वे निवेश करती हैं, उत्पादक परिसंपत्तियां बनाती हैं और भविष्य की तैयारी करती हैं। फिर एक सामान्य व्यक्ति ऐसा क्यों नहीं कर सकता? आने वाले वर्षों में वैश्विक परिस्थितियां और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ऐसे समय में केवल कमाना पर्याप्त नहीं होगा। कमाई को सही दिशा में लगाना भी उतना ही जरूरी होगा। इसलिए आज स्वयं से एक सरल प्रश्न पूछिए-यदि महंगाई अगले दस वर्षों तक जारी रही तो क्या आपकी वर्तमान आय और बचत आपके सपनों, जिम्मेदारियों और सम्मानजनक जीवनशैली को बनाए रख पाएगी? यदि उत्तर स्पष्ट नहीं है, तो शायद समय आ गया है कि हम केवल खर्चों का हिसाब रखना बंद करें और भविष्य के लिए निवेश का भी हिसाब शुरू करें। क्योंकि बढ़ती महंगाई के दौर में आर्थिक सुरक्षा संयोग से नहीं, बल्कि सुविचारित निवेश से बनती है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)

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