भरतकुमार सोलंकी / मुंबई
क्या आप हर महीने निवेश के लिए पूंजी जुटाने में कठिनाई महसूस करते हैं? क्या आपको लगता है कि महंगाई, खर्चे और बाजार की प्रतिस्पर्धा के कारण बचत और निवेश करना मुश्किल होता जा रहा है? यदि हां, तो क्या आपने कभी यह जांचने की कोशिश की है कि समस्या केवल आमदनी की कमी है या फिर आधुनिक तकनीक के उपयोग की कमी भी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है?
हाल ही में विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में देखने और समझने का अवसर मिला कि ऐसे अनेक छोटे और मध्यम व्यापारी आज भी पुराने तरीकों से काम कर रहे हैं। कई दुकानों में अभी तक कंप्यूटर, लैपटॉप, स्टॉक मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, बारकोड स्कैनर या डिजिटल बिलिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं नहीं हैं। सवाल यह है कि जब दुनिया मिनटों में काम पूरा कर रही है, तब क्या घंटों का काम घंटों में ही करना समझदारी है?
जरा सोचिए, एक व्यापारी रोजाना चार घंटे स्टॉक गिनने, हिसाब मिलाने और कागजी रजिस्टर संभालने में खर्च करता है, जबकि उसका प्रतिस्पर्धी वही काम तकनीक की मदद से आधे घंटे में पूरा कर देता है। अब सवाल यह है कि अतिरिक्त बचने वाले साढ़े तीन घंटे का उपयोग कौन बेहतर तरीके से करेगा? जाहिर है, वही व्यापारी जो नए ग्राहक जोड़ने, बिक्री बढ़ाने और अपने व्यवसाय का विस्तार करने में समय लगाएगा। कृषि क्षेत्र को ही देख लीजिए। एक समय था जब पूरा काम हाथों से होता था। फिर ट्रैक्टर, ड्रिप सिंचाई, आधुनिक बीज और मशीनरी आई। परिणाम क्या हुआ? उत्पादन बढ़ा, लागत घटी और आय में वृद्धि हुई। ठीक यही सिद्धांत व्यवसाय पर भी लागू होता है। चाहे वह कारीगर का औजार हो, किसान का उपकरण हो या व्यापारी का डिजिटल सिस्टम-तकनीक उत्पादकता बढ़ाती है और उत्पादकता ही आय बढ़ाने का सबसे बड़ा आधार है।
एक और महत्वपूर्ण सवाल है। क्या निवेश केवल बची हुई रकम से होता है या बढ़ी हुई आमदनी से? अधिकांश लोग खर्च कम करने पर ध्यान देते हैं, लेकिन आमदनी बढ़ाने के साधनों पर नहीं। जबकि वास्तविक निवेशक बनने के लिए पहले निवेश योग्य अधिशेष बनाना पड़ता है। यदि तकनीक आपके व्यवसाय की दक्षता बढ़ाकर १० प्रतिशत से २० प्रतिशत तक अधिक आय दिला सकती है, तो वही अतिरिक्त आय भविष्य में निवेश की पूंजी बन सकती है। आज के समय में तकनीक कोई खर्च नहीं, बल्कि आय बढ़ाने वाला निवेश है। जिस प्रकार एक मशीन कारखाने की उत्पादन क्षमता बढ़ाती है, उसी प्रकार डिजिटल उपकरण व्यापारी की कमाई बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। सवाल यह नहीं है कि कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर या बिलिंग सिस्टम पर कितना खर्च आएगा। असली सवाल यह है कि उन्हें नहीं अपनाने की कीमत आप कितनी चुका रहे हैं? याद रखिए, तकनीकी युग में केवल मेहनत करने वाला नहीं, बल्कि तकनीक के साथ समझदारी से मेनेज करने वाला आगे बढ़ता है और जो अपनी आय बढ़ाने में सफल होता है, वही नियमित निवेशक बनकर भविष्य में आर्थिक स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ा पाता है। इसलिए स्वयं से एक प्रश्न अवश्य पूछिए-क्या आपकी निवेश यात्रा को महंगाई रोक रही है, या फिर तकनीक से दूरी? क्योंकि आज का सबसे बड़ा निवेश केवल धन का नहीं, बल्कि सही तकनीक को अपनाने का है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)
