भरतकुमार सोलंकी
मुंबई
भारत में ऐसे लाखों ट्रेडिशनल बिजनेसमैन हैं, जो अकेले अपने दम पर कारोबार खड़ा करते हैं। लेकिन क्या वे सच में अपना बिजनेस ‘संस्था’ बना पाए हैं या सिर्फ अपने जीवन तक सीमित एक दुकान? क्या यह विडंबना नहीं कि जिनके हाथ में करोड़ों का स्टॉक, गोदाम और नाम है, उनके पास अपनी ही बैलेंसशीट पढ़ने का समय और सिस्टम नहीं? क्या आपने कभी खुद से पूछा है कि आपके बिजनेस का असली मालिक आप हैं या रोजमर्रा की लेन-देन की मजबूरियां?
जब कोई ट्रेडिशनल व्यापारी कहता है कि ‘मेरे पास दस करोड़ की संपत्ति है और तीन करोड़ देना है’, तो क्या वह यह भी गिनता है कि उन दस करोड़ में से सात करोड़ तो बाजार से वसूल होनेवाले हैं? क्या यह सच्चाई नहीं कि अगर कल कुछ अनहोनी हो जाए तो जिनको पैसा देना है वे तो आपके घर का दरवाजा खटखटाने आ जाएंगे, लेकिन जिनसे आपको पैसा लेना है वे आपके परिवार को पैसा देने शायद ही कभी आएं? फिर क्या यह बैलेंसशीट है या एक खतरनाक भ्रम, जिसमें आप जी रहे हैं? आपका बेटा मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करना चाहता है, आपका भाई अलग राह पर है और आपका बिजनेस सिर्फ आपके भरोसे चल रहा है – तो क्या यह बिजनेस है या आपकी व्यक्तिगत मेहनत का विस्तार? जिस दिन आप नहीं रहेंगे, उस दिन आपके गोदाम, ब्रांड, ग्राहक और देनदारियां किसके सहारे चलेंगी? क्या यह सच्चाई नहीं कि बिना कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर के कोई भी कारोबार ‘व्यक्ति आधारित’ रहता है, ‘संस्था आधारित’ नहीं? तो समाधान क्या है? क्या हर ट्रेडिशनल बिजनेस को कंपनी में बदलना जरूरी है? अगर आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत अगली पीढ़ी तक पहुंचे, तो हां। प्राइवेट लिमिटेड, एलएलपी या पैâमिली होल्डिंग स्ट्रक्चर बनाकर आप अपने बिजनेस को शेयरों में बांट सकते हैं, देनदारियों को सीमित कर सकते हैं और उत्तराधिकार को स्पष्ट कर सकते हैं। क्या इससे बैंक, सप्लायर और ग्राहक आपके बिजनेस पर ज्यादा भरोसा नहीं करेंगे? और वसूली-देयता के इस जाल से वैâसे निकलें? एक प्रोफेशनल अकाउंटिंग सिस्टम, एजिंग रिपोर्ट, क्रेडिट पॉलिसी और इंश्योरेंस कवर के बिना क्या कोई बड़ा कॉर्पोरेट चलता है? फिर आप क्यों सिर्फ अनुमान के भरोसे अपना जीवनभर का धन दांव पर लगाए हुए हैं? एक योग्य फाइनेंशियल एडवाइजर आपको बताएगा कि कहां आपका पैसा फंसा है, कहां रिस्क छुपा है और वैâसे आपकी बैलेंसशीट को ‘रियल’ बनाया जाए। अंत में सवाल सिर्फ इतना है – क्या आप ऐसे व्यापारी बनना चाहते हैं, जिसकी दुकान उसके साथ ही बंद हो जाए? याद रखिए, ट्रेडिशनल बिजनेस सम्मान देता है, लेकिन कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर ही उसे अमर बनाता है और इस परिवर्तन का रास्ता आपके अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से होकर ही जाता है।
(लेखक आर्थिक निवेश मामलों के विशेषज्ञ हैं)
