मुख्यपृष्ठस्तंभट्रंप के गले की हड्डी बन गया है ईरान

ट्रंप के गले की हड्डी बन गया है ईरान

शांति वार्ता के बीच फिर दी भीषण सैन्य हमले की धमकी

ईरान के साथ लंबे संघर्ष को समाप्त करने की कोशिश कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए तेहरान अब गले की ऐसी हड्डी बनता जा रहा है, जिसे न वह निगल पा रहे हैं और न ही उससे आसानी से छुटकारा पा रहे हैं। एक तरफ अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में ईरानी अधिकारियों के साथ शांति समझौते पर बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने ईरान को दोबारा भीषण सैन्य हमले की धमकी दे दी है।
ट्रंप ने रविवार शाम सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा कि ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने समर्थक गुटों को तत्काल नियंत्रित करना होगा। उनका स्पष्ट संकेत हिजबुल्लाह की ओर था। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने अपने इन कथित प्रॉक्सी संगठनों को क्षेत्र में परेशानी पैदा करने से नहीं रोका, तो अमेरिका उस पर पिछले सप्ताह किए गए हमलों से भी अधिक शक्तिशाली सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी स्विट्जरलैंड में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत कर रहे हैं। इन वार्ताओं का उद्देश्य युद्ध समाप्त करना, लेबनान में संघर्षविराम लागू कराना, होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौते की जमीन तैयार करना है। ट्रंप की नई धमकी ने शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर उनका प्रशासन ईरान के साथ संबंधों में बुनियादी बदलाव और स्थायी समझौते की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर राष्ट्रपति लगातार सैन्य हमले की भाषा बोल रहे हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अमेरिका कूटनीति और सैन्य दबाव-दोनों का एक साथ इस्तेमाल कर ईरान को झुकाना चाहता है।
हालांकि, ईरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान के मुद्दे को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में ट्रंप की धमकियां बताती हैं कि तमाम सैन्य शक्ति के बावजूद अमेरिका के लिए ईरान संकट से सम्मानजनक और आसान रास्ता निकालना अभी भी बेहद कठिन बना हुआ है।
भड़का ईरान; गालिबाफ बोले- बयानों को लेकर सावधान रहें
ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद एक बार फिर से टकराव के आसार नजर आने लगे हैं। ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य को धमकाने से कोई फायदा नहीं होगा। गालिबाफ ने कहा, ‘उन्हें अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। हमारी सशस्त्र सेनाएं उन्हें अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं। वे चाहे कुछ भी कहें, कार्रवाई हम करते हैं।’

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