मनमोहन सिंह
वाह! मान गए हमारी खेल व्यवस्था की टाइमिंग को। जब देश की एक बेहतरीन पहलवान साल २०२८ के लॉस एंजिल्स ओलिंपिक को ध्यान में रखकर नंदिनी नगर महाविद्यालय के अखाड़े में वापसी की तैयारी कर रही थी, तभी भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को अचानक ‘नियम-पुस्तिका’ की याद आ गई। नियम भी ऐसा-वैसा नहीं, बल्कि सीधे संयुक्त विश्व कुश्ती (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) का वह फरमान, जिसके मुताबिक अगर आपने रिटायरमेंट के बाद वापसी की सोची है तो छह महीने पहले बाकायदा अर्जी लगानी होगी।
अब इसे खुन्नस कहें या महासंघ का खेल के प्रति अति-अनुशासन? जिस नंदिनी नगर महाविद्यालय में यह ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट हो रहा था, उसके मालिक कोई और नहीं बल्कि पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह हैं, जिनके खिलाफ विनेश सहित छह महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाकर सड़क से अदालत तक की लड़ाई लड़ी थी। बृज भूषण भले ही विनेश को सीधे पटखनी न दे पाए हों, लेकिन महासंघ ने उनके ‘होम ग्राउंड’ पर विनेश की वापसी की कोशिशों को तकनीकी दांव-पेच से रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी। महासंघ ने केवल अयोग्य ही घोषित नहीं किया, बल्कि तीन पुराने मामलों की ‘भेलपूरी’ बनाकर एक भारी-भरकम कारण बताओ नोटिस भी थमा दिया। पहला आरोप- पेरिस ओलिंपिक में ५० किलोग्राम भार सीमा का पालन न करना (जैसे विनेश ने जानबूझकर ऐसा किया हो)। दूसरा आरोप- एंटी-डोपिंग नियमों के तहत ‘व्हेयरअबाउट्स’ (ठिकाने) की जानकारी न देना। वैसे, वाडा (डब्ल्यूएडीए) का नियम कहता है कि १२ महीने में तीन बार चूक होने पर कार्रवाई होती है, जो विनेश पर लागू नहीं होती। लेकिन नियम तो नियम हैं, खासकर तब जब वे किसी खास खिलाड़ी पर आजमाने हों!
तीसरा और सबसे मजेदार आरोप यह है कि मार्च २०२४ में विनेश ने दो भार वर्गों (५० किग्रा और ५३ किग्रा) के ट्रायल्स में हिस्सा लेकर नियम तोड़ा। मजे की बात देखिए, वे ट्रायल्स खुद सरकार द्वारा गठित एक तदर्थ समिति ने कराए थे, क्योंकि उस वक्त डब्ल्यूएफआई खुद सस्पेंड चल रहा था। अब खुद की गैर-मौजूदगी के दौर के मामलों को खोदकर निकालना और दो साल पुरानी बातों को एक साथ जोड़कर ३१ वर्षीय खिलाड़ी के सामने परोस देना, महासंघ की ‘परिपक्वता’ और ‘खेल भावना’ का जीता-जागता सबूत है। एक अभिभावक संस्था के रूप में डब्ल्यूएफआई को विनेश की वापसी का रास्ता आसान बनाना चाहिए था, लेकिन यहां तो ‘कानून का जामा’ पहनाकर वापसी को नाकाम करने की बिसात बिछाई गई। खैर, हरियाणा से कांग्रेस की विधायक चुनी जा चुकीं विनेश भी हार माननेवालों में से नहीं हैं। वे अपनी कानूनी टीम के साथ १४ दिनों के भीतर इस ‘प्रेम पत्र’ (नोटिस) का जवाब तैयार कर रही हैं। अब देखना यह है कि वैश्विक संस्था यूडब्ल्यूडब्ल्यू इस भद्दे मुकाबले में दखल देती है या भारत अपनी ही खेल राजनीति के अखाड़े में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर शर्मिंदा होने का इंतजार करता रहेगा।
