मुख्यपृष्ठसमाचारजगन्नाथ मंदिर भूमि पूजन: स्वामी सारंग ने दिया विश्व शांति का संदेश

जगन्नाथ मंदिर भूमि पूजन: स्वामी सारंग ने दिया विश्व शांति का संदेश

हिमांशु राज

काशी के अस्सी घाट स्थित जगन्नाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य शुक्रवार को शुरू हुआ। कांची कामकोटि पीठाधीश्वर स्वामी शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने शिला पूजन और शिलान्यास किया।

स्वामी सारंग जी महाराज ने कहा, “यह भूमि पूजन केवल मंदिर के जीर्णोद्धार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म की शांति वाहिनी है, जो विश्व में समृद्धि की ज्योति प्रज्वलित करेगी।”

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के अध्यक्ष बृजेश सिंह अपनी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह के साथ उपस्थित रहे। लगभग एक लाख वर्गफुट क्षेत्र में विकास कार्य अब प्रगति पर है। निर्माण कार्य धौलपुर के शिल्पकार गिरिराज सैनी द्वारा किया जाएगा। इसके लिए अनुमानित समय तीन वर्ष निर्धारित किया गया है, जबकि कुल लागत लगभग 50 करोड रुपये आंकी गई है। जनसहयोग से अब तक 30 करोड रुपये एकत्र किए जा चुके हैं।

निर्माण में धौलपुर के पत्थरों का उपयोग किया जाएगा। मंदिर नागर शैली में निर्मित होगा, जिसमें दो शिखर, मुख्य प्रासाद, यज्ञ मंडप और वेदाध्ययन कक्ष शामिल होंगे। इसका डिजाइन जगन्नाथ पुरी से प्रेरित होगा, साथ ही वर्तमान मंदिर की छवि को भी संरक्षित रखा जाएगा। शिखर पर पारंपरिक ध्वज फहराया जाएगा और तीनों विग्रह यथावत रहेंगे।

मंदिर की स्थापना 17वीं शताब्दी में पुरी सेवक ब्रह्मचारी जी द्वारा की गई थी। पुरी के राजा से मतभेद के बाद वे काशी आए और केवल जगन्नाथ प्रसाद ग्रहण करने का संकल्प लिया। इसके बाद राजा ने पुरी से कांवर के माध्यम से प्रसाद भेजने की व्यवस्था की।

वर्ष 1790 में स्वप्न में भगवान के आदेश मिलने पर यहां मूर्तियों की स्थापना की गई। भोसला राजघराने के सहयोग से 1802 में रथयात्रा की परंपरा आरंभ हुई, जो आज भी जारी है। महामारी के कठिन दौर में भी यहां पूजन परंपरा निरंतर बनी रही। मंदिर परिसर में ब्रह्मचारी जी की समाधि और उनकी व्यक्तिगत वस्तुएं आज भी सुरक्षित रूप से संरक्षित हैं।

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