-एआई से ऑडियो तैयार किए जाने के दावे को दी चुनौती
-५०० करोड़ के कथित लेन-देन से महाराष्ट्र की सियासत में उबाल
-फडणवीस-शिंदे से निष्पक्ष जांच की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में ५०० करोड़ रुपये के कथित लेन-देन से जुड़े ऑडियो क्लिप विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील ने महायुति सरकार को चेतावनी देते हुए दावा किया है कि उनके पास चार और ऑडियो क्लिप हैं। उन्होंने इन रिकॉर्डिंग को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए जाने के दावे को भी चुनौती दी है। इस विवाद से राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
जरांगे ने २२ अक्टूबर को एक कथित ऑडियो क्लिप सार्वजनिक की थी। उनका आरोप है कि इसमें भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की बातचीत में मराठा आरक्षण आंदोलन को प्रभावित करने और उन्हें कथित तौर पर ५०० करोड़ रुपये दिए जाने की चर्चा है। इस कथित रकम को शिंदे गुट के सांसद श्रीकांत शिंदे के माध्यम से पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों और ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जरांगे का कहना है कि यदि एकनाथ शिंदे के परिवार से जुड़े लोगों तक कोई पैसा नहीं पहुंचा, तो उन्हें बदनाम करने की जरूरत ही क्या है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी की राजनीतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची गई थी।
एआई का दावा या सच्चाई पर पर्दा?
ऑडियो क्लिप को एआई से तैयार किए जाने की आशंका जताए जाने पर जरांगे ने आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि रिकॉर्डिंग को फर्जी साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कथित ऑडियो क्लिप की फॉरेंसिक जांच कराने का आश्वासन दिया है। भाजपा और शिंदे गुट के नेताओं ने रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं, जबकि एकनाथ शिंदे ने ५०० करोड़ रुपये से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए जांच की मांग की है।
चार और क्लिप से बढ़ेगी सियासी हलचल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित ऑडियो क्लिप में कितनी सच्चाई है और इसके पीछे कौन है। जरांगे के चार और क्लिप सामने लाने के दावे से महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में विवाद और गहराने की आशंका है। यदि ये रिकॉर्डिंग सार्वजनिक होती हैं, तो उनकी प्रामाणिकता, उनमें दर्ज बातचीत के संदर्भ और कथित लेन-देन की जांच इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम होगी।
