मुख्यपृष्ठस्तंभजीवन दर्पण : दवा और दुआ दोनों करें... जल्द मिलेगा संतान...

जीवन दर्पण : दवा और दुआ दोनों करें… जल्द मिलेगा संतान सुख

डॉ. बालकृष्ण मिश्र
काशी के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्विद

गुरुजी, शादी के कई वर्षों बाद भी अभी तक संतान सुख से वंचित हूं?
– मुकेश पठारे
(जन्म- १५ मई १९९१, समय- प्रात: ७:४८, स्थान- सातारा, महाराष्ट्र)
मुकेश जी, आपका जन्म बुधवार के दिन रोहिणी नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है और आपकी राशि वृषभ बन रही है। लग्न के आधार पर अगर हम संतान के बारे में देखें तो वृषभ लग्न में आपका जन्म हुआ है और संतान का विचार पंचम भाव से किया जाता है। पंचम भाव का स्वामी बुध आपकी कुंडली में १२वें भाव पर बैठा है। पंचम भाव का स्वामी यदि १२वें भाव पर बैठता है तो संतान में विलंब होता है और दूसरे स्थान पर छठे भाव का स्वामी शुक्र है इसलिए आपको दवा और दुआ दोनों करना होगा। कुंडली में कालसर्प योग होने के कारण आप इसकी पूजा करवाएं। आपको अपनी पत्नी की भी कुंडली दिखवाना चाहिए। खैर, आपकी कुंडली के आधार पर २०२७ में संतान होने के प्रबल योग बन रहे हैं। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, मेरा तलाक हो गया है। दूसरी शादी कब तक होगी?
– मनाली कुलकर्णी
(जन्म- ४ अक्टूबर १९९२, समय- रात्रि ११:४५, सांताक्रुज, मुंबई)
मनाली जी, आपका जन्म रविवार के दिन उत्तराषाढ़ नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है और आपकी राशि मकर बन रही है। यदि लग्न के आधार पर हम देखें तो मिथुन लग्न में आपका जन्म हुआ है और लग्न में ही मंगल के साथ केतु और अष्टम भाव पर चंद्रमा के साथ शनि बैठा हुआ है इसलिए आपकी कुंडली मांगलिक है। आपकी कुंडली मांगलिक होने के साथ ही कुंडली में अनंत नामक कालसर्प योग भी बना हुआ है। इस कालसर्प योग के कारण पहले विवाह में पति के साथ ईगो प्रॉब्लम, वैचारिक मतभेद आदि के कारण वैवाहिक जीवन ठीक नहीं था, लेकिन दूसरा विवाह निश्चित होने से पहले आपको कालसर्प योग की पूजा करवाना चाहिए। अगर महादशा के आधार पर हम देखें तो इस समय राहु की महादशा में केतु का अंतर समाप्त हो गया है। जल्द ही आपको कोई अच्छा रिश्ता मिलेगा और आपका जीवन सुखमय हो जाएगा। जीवन की गहराइयों को जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।
गुरुजी, मेरा करियर वैâसा रहेगा?
– मुकेश भाकर
(जन्म- १३ अक्टूबर १९९६, समय- रात्रि ३:५५ बजे, स्थान- अंधेरी, मुंबई)
मुकेश जी, आपका जन्म रविवार के दिन चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण में हुआ है और आपकी राशि तुला बन रही है। लग्न के आधार पर अगर हम देखें तो सिंह लग्न में आपका जन्म हुआ है और सिंह लग्न का स्वामी सूर्य आपकी कुंडली में द्वितीय भाव पर राहु के साथ बैठा हुआ है। राहु के साथ यदि सूर्य बैठता है तो ग्रहण योग बना देता है और यदि बुध बैठता है तो जड़ नामक योग बना देता है। आपकी कुंडली को अगर हम देखें तो कुलिक नामक कालसर्प योग भी बन रहा है। इस कुलिक नामक कालसर्प योग के कारण चिड़चिड़ापन, मेहनत के बावजूद फल न मिलना, मन उदास रहना, काम के प्रति एक्टिव न रहना जैसी तमाम प्रकार की असुविधा होती हैं। आपकी कुंडली को अगर हम देखें तो मंगल भाग्य भाव का स्वामी है, जो नीच राशि का हो करके १२वें भाव पर बैठकर अपनी पूर्ण दृष्टि से पराक्रम भाव को देख रहा है। किसी भी कार्य को करने के लिए यदि आप बार-बार प्रयास करते हैं तो निश्चित सफलता मिल जाती है। कुलिक नामक कालसर्प योग की आपको वैदिक विधि से पूजा करवानी चाहिए। यदि महादशा के आधार पर हम देखें तो गुरु की महादशा में बुध का अंतर चल रहा है। जीवन को विस्तारपूर्वक जानने के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

अन्य समाचार