मुख्यपृष्ठनए समाचारपत्नी को फोन पर तीन तलाक देने वाले पति पर कानूनी शिकंजा

पत्नी को फोन पर तीन तलाक देने वाले पति पर कानूनी शिकंजा

सुरेश गोलानी / मुंबई
काशीमीरा पुलिस थाना क्षेत्र में एक महिला को फोन पर तीन बार ‘तलाक’ बोलकर रिश्ता तोड़ने, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मारपीट करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस संबंध में मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, २०१९ और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत पीड़िता के पति और उसके सगे भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पीड़िता का विवाह अप्रैल २०११ में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। शादी में पीड़िता के पिता ने दहेज के रूप में एक तोला सोना के गहने और घरेलू सामान दिया था। विवाह के बाद दोनों से तीन बेटियां हुर्इं, जिनकी उम्र वर्तमान में क्रमश: १३ वर्ष, १२ वर्ष और ८ वर्ष है। आरोपी पति पेशे से टैक्सी ड्राइवर है और उसी की कमाई से पूरे परिवार और तीन बेटियों का उदरनिर्वाह चलता था। विवाह के बाद से ही घरेलू कारणों को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था, इसी बीच जनवरी २०२६ में पीड़िता को जानकारी मिली कि उसके पति के किसी अन्य महिला के साथ प्रेम संबंध हैं। इस बात का विरोध करने पर पति ने उसके साथ मारपीट की, जिससे आहत होकर वह घर से चली गई।
इसके बाद पति ने महिला के मोबाइल पर कॉल किया और अपनी मां व बच्चों को गवाह रखकर फोन पर ही तीन बार ‘तलाक, तलाक, तलाक’ बोलकर रिश्ता तोड़ दिया। हाल ही में जब पीड़िता ने अपने खर्च के लिए पैसे मांगे, तो पति ने उसे घर से निकाल दिया और तलाक के कागजात देने की बात कही। महिला ने जब शादी के समय दहेज में दिया गया अपने गहने वापस मांगे, तो पति ने उसे दोबारा बेरहमी से पीटा। पीड़िता ने जब इस पूरे मामले की शिकायत अपने सगे भाई से की और मदद मांगी, तो उसने भी साथ देने के बजाय उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की।
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क्या कहता है तीन तलाक कानून?
देश में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने २०१९ में ‘मुस्लिम महिला (विवाह के अधिकारों का संरक्षण) कानून’ पारित किया था। इस कानून के तहत मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक (जैसे फोन या मैसेज) या किसी भी अन्य माध्यम से एक बार में तीन तलाक देना पूरी तरह से गैर-कानूनी माना जाता है। कानून की धारा ४ के तहत, पत्नी को अवैध तरीके से तीन तलाक देने वाले पति को ३ साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। यह अपराध गैर-जमानती है और पुलिस इस मामले में आरोपी पति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। इस कानून के तहत पीड़ित महिला अपने और अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता पाने की भी हकदार है।

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