हिमांशु राज
‘भूल भुलैया 3’ को भले ही रिलीज़ हुए एक वर्ष बीत चुका हो, पर इसकी चमक अब भी दर्शकों के मन में ताज़ा है। वर्ष 2024 की दिवाली पर प्रदर्शित यह फिल्म सिर्फ एक ब्लॉकबस्टर नहीं थी, बल्कि उस क्षण की साक्षी बनी जब माधुरी दीक्षित और विद्या बालन एक ही मंच पर उतरीं। यह दृश्य भारतीय सिनेमा के इतिहास में शक्ति, सौंदर्य और परंपरा का प्रतीक बन गया।जब पर्दे पर ‘आमी जे तोमार 3.0’ की धुन गूंजी, पूरा वातावरण जैसे मंत्रमुग्ध हो उठा। विद्या बालन ने फिर से मंजुलिका के रहस्यमय रूप में वही प्रखरता और जुनून दिखाया, जिसने 2007 में उन्हें अमर बना दिया था। वहीं सामने थीं माधुरी दीक्षित, जिन्हें देखना मानो नृत्य और अनुशासन की एक जीवंत मूर्ति को देखना था। उनकी मुद्रा, भाव और संगति नृत्य को एक दिव्यता प्रदान कर रहे थे।निर्देशक अनीस बज्मी ने इस क्षण को ऐसी संवेदनशीलता से गढ़ा कि यह सिर्फ एक फिल्मी दृश्य नहीं रहा, बल्कि भक्ति, भय और भाव के बीच संतुलन रचता हुआ अनुभव बन गया। कोरियोग्राफी में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहराई झलकी, जिसे आधुनिक सिनेमाई रंगों में संयोजित किया गया।एक साल बाद भी ‘आमी जे तोमार 3.0’ सिर्फ गीत नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की आत्मा का एक उज्ज्वल प्रतिबिंब है—जहां माधुरी और विद्या ने अपनी नृत्यशक्ति और संवेदना से भारतीय सिनेमाई सौंदर्य को दिव्यता में परिवर्तित कर दिया।
