डॉ. ममता शशि झा मुंबई
दिनकर जी अपन पोता के विवाह में गाँव सँ शहर आयल छला। विवाह के तैयारी में घरक सब लोक व्यस्त छलखिन। आई-काल्ही के बियाहक तौर-तरीका हुनका ओहुनो नहिं सोहाई छलनि, मुदा नहिं ऐला सँ बेटा-पुतहु के अजोस भ जेतनि ताहि लेल आब पड़लनि। मनोरमा बुझई छलखिन जे ई नाच-गान हुनका पतिदेव के नहिं नीक लगतनि। आ हुनकर बजनाई पुतहु के नहिं नीक लगतनि। शहर ऐला के बाद घरक भीड़ में दुनु गोटे अपना आप के बहुत असगर बुझि रहल छलखिन। खेनाई बनाब लेल भनसिया, आ लोक के देखभाल आ स्वागत कर लेल इभेंट मेनेजमेंट भला सब। आब कनिया-बर के माता-पिता के अपन एनजोयमेंट के बेसी चिंता रहई छई, पैसा पानी जँका बहई छई आ मोन में स्नेह सुखायल!
घरक भीड़ सऽ बच लेल दुनु गोटे लगक बगीचा में जाय के बिचार केलथि। बिदा होअ काल में ड्राइवर कहलकनि जे हम अहाँ के बगीचा धरि लेने चलई छी, ताहि पर ओ मना करईत कहलखिन जे कनिके दूर तक छई हम सब बुलईत-टहलईत चलि जायब। ड्राईवर कहलकनि जे दिक्कत हेतनि ताहि पर दिनकर जी बजला, ‘एखनो अहि पैर में बड़ ताकत अछि।’ ड्राइवर खालि मुसकियाईत हुनका दिस देखलक, किछु बाजल नहिं। नीचा उतरलथि तऽ देखलखिन जे सफाई कर्मचारी सब बरखा सँ पहिने के नाला साफ कर के बिध कऽ रहल छई। जेना पहिने करई छलई। नाला में का गंदगी, नाला में सँ निकालि क सड़क पर राखि रहल छलई, जाहि स नाम लेल जे सड़क आ कह लेल जे फुटपाथ छलई ओहु बाटे चल लेल जगह नहिं बचल छलई। कहुना कऽ दुनु गोटे बीच सड़क में सँ चलि क बगीचा दिस जाय लगला तो पाछा सँ जोर सँ होरन बजबईत रिक्शा बला, नाला के गंदगी निकालला स जे पानी सड़क पर बहई छलई से पुरा देह पर उड़बईत आगू बढ़ि गेलनि। दुनु गोटे दुनिया भरि के गारि पढ़ के मोन होई छलनि, ताबते एकटा मोटरसाइकिल सवार फुटपाथ पर चल के सलाह दईत आ छर्र स गंदा पानी हुनका सब पर उड़बईत आगू बढ़ि गेलनि। आब तो दिनकर जी तामसे भेर भ गेला, आगु फुटपाथ पर कतहु कुकुर पोस बला सब ओकरा घिनौने छल, कतहु बाईक ठाड़ छल त कतहु लोक सब गोलिया क ताश खेलाई छल, फुटपाथ छल मुदा ओहि पर चल के जगह नहिं छल!
चलनाई सनक सरल काज, शहर में एकटा चुनौती बनि गेल छलनि। फोन कऽ क ड्राइवर के बजेलथि, गाड़ी में बैसि क बाहर दिस नजर गेलनि तऽ देखलखिन हुनकर ड्राइवर दोसरा सब पर नाली बला पानी के छिंटा उड़बईत तेजी स घर दिस ल जा रहल छलनि!!!
