मुख्यपृष्ठस्तंभमैथिली व्यंग्य : प्रकृति आ माय!

मैथिली व्यंग्य : प्रकृति आ माय!

डॉ. ममता शशि झा मुंबई

राधा के स्कूल पहुचईते रीमा कहलखिन जे आई प्रâी पीरियड में का लेब किछु, टिफिन बला छुट्टी में उप प्राचार्य मीटिंग लेब बला छथिन।
राधा- ‘प्रâी पीरियड होइते अहाँ अछि, ओहि में त कोनो ने कोनो क्लास में पठा दई छथिन, हुनकर पसिन्न के लोक सब हुनका केबिन में जे बैसल रहइ छथिन हुनकर क्लास में।’ एक्कहु छन के ककरो साँस लेब के फुर्सत नहीं भेटा तकर बड़ ध्यान रखइ छथिन। ‘काज मोन भरि आ पाई छटांग भरि!!’
रीमा- ‘सही मे शिक्षक राष्ट्र के निर्माता कहल जाय छइ, मुदा जे निर्माता अछि व्येह आर्थिक रूप सँ आ मानसिक रूप सँ संतुलित नहिं अछि, त कोना संतुलित नवतुरिया के निर्माण करत! टगमगाइत धरती पर गाछ नहिं रोपल जा सकइया। असुरक्षित शिक्षक, सुरक्षित नागरिक नहिं तैयार क सकइत अछि। नियम बनाब बला जा धरि पढ़ल-लिखल नहिं होयत था धरि शिक्षक के कोन काज नहि देल जाय से नहि बुझि सकइया। अशिक्षित लोक सब शिक्षा जगत के निर्णय कोन आधार पर लई छथिन से हमरा आश्चर्य लगइया!!’
राधा- ‘शिक्षा मंत्री के अशिक्षित भेनाइ देश के लेल दुर्भाग्यक बात होइ छइ।’
रीमा- ‘से त‌ छहिये, मुदा हुनका संगे जे पढ़ल-लिखल आइ.ए.एस.आ, शिक्षा विभाग के अधिकारी सब रहइ छथिन सेहो सब हुनका नजर मे नीक बन लेल आ अपन-अपन लोक सब के स्कूल-कॉलेज के मंता दियबा के पाई कमाब लेल जी-हुजूरी मे लागल रहइ छथिन।’
राधा- ‘चलु क्लास मे जेबाक बेर भे गेल। जाने कोन बात आ काज अजुका मिटिंग मे कहल आ देल जायत!’
टिफिन बला छुट्टी में उप प्राचार्य महोदया जीनका गुण नहिं, प्रधानाचार्या के पसिन्न आ चुगली कर के लेल बनायल गेल छलनि, जिनकर क्यो सम्मान नहिं करइ छलनि, स्टाफ रूम मे आबि क कुटिल मुस्कि चेहरा पर आनि कऽ बजलि, ‘अहि बेर अपना मेनेजमेंट के लोग सब पर्यावरण दिन के उपलक्ष्य मे आ बच्चा सब के महत्व बुझाब लेल गाछ लगाब के उपक्रम सुनिश्चित केलखिन हे, जाहिमे हर बच्चा अपन माय के नाम पर एगो गाछ लगायत आ ओहि गाछ के लगेला के बाद अपन माय संगे फोटो खिचा कऽ सोशल मीडिया आ स्कूल के वेवसाईट पर पोस्ट करत जाहि सँ अहि स्कूल के मेनेजमेंट माय आ प्रकृति दुनु के महत्ता बुझइ छइ से समाद लोकसबहक बीच जेतइ। अहिमे सब शिक्षक सब के सहभागी हेबाक अछि। शहर स बाहर एकटा अगह-बिगह जमीन ताकल गेल अछि, ओहि ठाम जा क वृक्षारोपण कार्य संपन्न करबाक अछि, जाहि के लेल हम मेनेजमेंट के धन्यवाद दइ छियनि।
रीमा आ राधा के बुझल छलनि जे ओ अगह स बिगह जमीन अध्यक्ष महोदय के छनि, जे हुनका ऑर्गेनिक फार्मिंग करेबाक छनि!!

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