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लालबाग में वीआईपी और आम भक्तों में बड़ा भेदभाव…भक्तों का फूटा गुस्सा

-इनके आते ही धक्का-मुक्की और झड़पें की शिकायतें

-मानवाधिकार के नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

-बाप्पा के सभी भक्तों का होना चाहिए सम्मान

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा के दरबार में दर्शन व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि आम भक्त घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं, जबकि वीआईपी और प्रभावशाली लोगों के पहुंचते ही दर्शन व्यवस्था का पूरा समीकरण बदल जाता है। आम भक्तों को जल्दबाजी में आगे बढ़ाने, धक्का-मुक्की और कथित दुर्व्यवहार के आरोपों से भक्तों में भारी नाराजगी है। हाल के दिनों में सामने आए वीडियो और रिपोर्टों में भी सामान्य भक्तों को जल्दी-जल्दी आगे बढ़ाए जाने तथा वीआईपी लोगों को कथित विशेष सुविधा दिए जाने को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

2025 में महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी वीआईपी दर्शन से जुड़े आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। शिकायत में गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और अन्य सामान्य भक्तों के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा अलग-अलग दर्शन व्यवस्था पर आपत्ति उठाई गई थी। 2026 में भी आयोग ने इस विवाद पर सुनवाई करते हुए भक्तों, विशेषकर महिला भक्तों के साथ कथित गैरवर्तन पर चिंता जताई है। लालबाग दर्शन के लिए महाराष्ट्र के जिला नंदुरबार से आए भक्त अलंकार पाटवले जिनको तकरीबन सात से आठ घंटे तक कतार में खड़े होने के बाद दर्शन मिला उनका सवाल है कि बप्पा सबके हैं तो दर्शन में भेदभाव क्यों? जिस भक्त ने घंटों कतार में खड़े होकर दर्शन की प्रतीक्षा की, उसे सम्मान मिलना चाहिए। वीआईपी हो या सामान्य नागरिक, भक्त की श्रद्धा का मूल्य एक समान होना चाहिए। ये भेदभाव ठीक नहीं।

इस सन्दर्भ में पिछले वर्ष ही अधिवकता आशीष राय, अधिवक्ता पंकजकुमार मिश्रा, अधिवक्ता प्राची पाण्डेय के द्वारा पैरवी की गयी थी मानवाधिकार याचिकाकर्ता और अधिवक्ता आशीष राय ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लालबाग में वीआईपी कल्चर और आम श्रद्धालुओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के संदर्भ में हमने पूर्व में ही माननीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष गंभीर चिंता व्यक्त की थी। हमने आयोग को आगाह किया था कि ऐसी व्यवस्था से किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है और दुर्भाग्य से हमारी वह आशंका सच साबित हुई है। इस मामले में आयोग ने अगली सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर की तारीख तय की है। यदि भविष्य में भी भक्तों के साथ इस तरह का अनादर या दुर्व्यवहार जारी रहता है, तो हम तुरंत मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में इन घटनाओं को लाएंगे और अंतरिम दिशानिर्देश जारी करने हेतु प्रार्थना करेंगे।

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