मुख्यपृष्ठधर्म विशेषकहीं रूठीं न रह जाएं माता लक्ष्मी

कहीं रूठीं न रह जाएं माता लक्ष्मी

शीतल अवस्थी

अश्विन मास की पूनम के उजाले के साथ ही घोर अंधकार से भरी रात में जीवन को खुशहाल करने के पर्व की दस्तक हो गई है। दीपोत्सव पर तन-मन को शांतिरूपी उजाले से रोशन करने के संकल्प व समृद्धि की चाहत में श्री, वैभव, ऐश्वर्य और तमाम संसारिक सुखों की अधिष्ठात्री मां लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है। देवी लक्ष्मी को धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है, सुख-समृद्धि और शांति की मंगल कामना के लिए वैभव की देवी माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। मां लक्ष्मी जिस पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालती हैं वह दरिद्रता, दुर्बलता, कृपणता से मुक्त हो जाता है।
शुक्रवार मां लक्ष्मी का प्रिय दिन माना गया है। इस दिन धन, ऐश्वर्य, भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए मां की पूजा और उपाय दोहरा लाभ दिलाते हैं। वैसे लक्ष्मीजी की पूजा हर घर में होती है, लेकिन हर घर में समृद्धि नहीं आती। कारण, कई बार हम अज्ञानतावश उन्हें नाराज कर देते हैं, उनकी पूजा-अर्चना, विधि-विधान और उपयुक्त समय से नहीं करते। इसलिए हमें उनकी नाराजगी का भाजक बनना पड़ता है। दीपावली माता लक्ष्मी को मनाने का उत्तम समय है। दीपोत्सव की सबसे बड़ी खासियत है रोशनी, क्योंकि इस पर्व पर तन-मन व आत्मा को भी रोशन करने के महत्व से दीपों की जोत जलाई जाती है। इसलिए यह प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दरअसल, शास्त्र व परंपराओं के मुताबिक, जीवन के लिए अर्थ यानी धन व भोग्य वस्तुओं की बहुत अहमियत बताई गई है। खासतौर पर धन को लक्ष्मी स्वरूप माना गया है। यही वजह है कि अक्सर लक्ष्मी के पीछे दुनिया भागती दिखाई देती है। चूंकि लक्ष्मी का स्वभाव चंचल माना जाता है, इसलिए लक्ष्मी कहां जाना और रहना चाहती हैं? अगर यह जान लें तो संभवत: धन ही नहीं इच्छा पूर्ति व सुख-शांति की कवायद में चल रही दौड़-भाग कम या खत्म भी हो सकती है, क्योंकि फिर लक्ष्मीजी आप से कभी मुंह नहीं मोड़ेंगी। प्रतिदिन सच्चे मन से लक्ष्मी पूजन करने से वे आपके निवास पर स्थायी रूप से रुक सकती हैं। जिस घर में प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ होता है, वहां मां लक्ष्मी अवश्य निवास करती हैं।
इस बार दीपावली पर सौभाग्य, बुधादित्य व धाता योग बन रहा है। ये तीनों योग बहुत ही विशेष हैं। इन योगों में की गई लक्ष्मी पूजा से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति संभव है। ये योग धन लाभ के लिए भी बहुत शुभ माने गए हैं। अनाज, किराना, धातु व राजनीति से जुड़े लोगों के लिए ये योग बहुत खास रहेंगे। गुरु इस समय सिंह राशि में स्थित है। इस कारण भी देश के लिए यह दीपावली महत्वपूर्ण रहेगी। सभी ओर आनंद रहेगा एवं व्यापार में उन्नति होगी। गुरु सिंह राशि में व राहु कन्या राशि में रहने से लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए गए उपायों में सफलता मिलेगी। राहु की अच्छी स्थिति के कारण इस दिन किए गए तांत्रिक प्रयोग सिद्ध होंगे। महाभारत में लिखित है कि आलस और परिश्रम न करने वाले से महालक्ष्मी रूष्ट हो जाती हैं। इसलिए आलस का त्याग करें और मेहनत से काम करें, माता लक्ष्मी आप पर हमेशा प्रसन्न रहेंगी तथा धन की वृद्धि होगी। जहां भी स्वच्छता एवं सुव्यवस्था के गुण होंगे, वहां दरिद्रता का कोई स्थान नहीं होता, लेकिन यदि आसपास का वातावरण साफ-सुथरा नहीं हो तो मां लक्ष्मी अपने पीछे दरिद्रता छोड़ व्यक्ति के जीवन से सदैव के लिए विदा ले लेती हैं। इसलिए लक्ष्मीजी की असीम कृपा पाने के लिए घर से अवांछित सामान, पुराने कपड़े, जूते, डिब्बे आदि तुरंत हटा दें। ये सामान नकारात्मक ऊर्जा के स्त्रोत होते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपके घर पर मां लक्ष्मी की दया हमेशा बनी रहे, तो अपने घर के नलों व टूटियों की जांच कर लें। किसी भी नल से पानी बहना या टपकना नहीं चाहिए। इससे लक्ष्मीजी रूठ जाती हैं। तुरंत अपने घर के सभी नल ठीक करवा लें। जिस घर में स्नेह, वात्सल्य, आत्मीयता और शांति का वास होता है, वहीं लक्ष्मीजी का वास होता है। इसलिए अपने परिवार के सदस्यों के साथ प्रेमपूर्वक संबंध रखें और उन्हें पूरा सम्मान दें। अगर आप माता लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं तो सबसे पहले घर की महिलाओं का आदर-मान करना सीखें। जो व्यक्ति भगवान विष्णु की उपासना नहीं करता तथा एकादशी और जन्माष्टमी के दिन अन्न खाता है, उसके घर से भी लक्ष्मी चली जाती हैं। जहां भगवान श्रीहरि के गुणों का कीर्तन होता है, वहीं पर सम्पूर्ण मंगलों को भी मंगल प्रदान करने वाली भगवती लक्ष्मी निवास करती है। इसी तरह जहां शंखध्वनि नहीं होती, तुलसी का निवास नहीं रहता, शंकरजी की पूजा नहीं होती, वहां लक्ष्मी नहीं रहतीं। जिस स्थान पर शंखध्वनि होती है, तुलसी का निवास रहता है व इनकी सेवा, वंदना होती है, वहां लक्ष्मी सदा विद्यमान रहती हैं।

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