हिमांशु राज
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के मौके पर अभिनेत्री शिवांगी वर्मा, जिन्होंने ‘तेरा इश्क मेरा फिटूर’ और ‘छोटी सरदारनी’ जैसे शोज में काम किया है और इन दिनों वेब सीरीज ‘ये है सनक’ में नजर आ रही हैं, पुरुषों की मानसिक सेहत, भावनात्मक समानता और उन पर पड़ने वाले दबावों पर खुलकर बात करती हैं। शिवांगी का मानना है कि ये दिन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का मौका है कि पुरुष भी उतनी ही भावनात्मक समझ और ध्यान के हकदार हैं, जितना महिलाएं। शिवांगी कहती हैं, “पुरुषों की मानसिक सेहत अक्सर नजरअंदाज की जाती है, क्योंकि उन्हें हमेशा मजबूत और चुप रहना सिखाया जाता है। बहुत से पुरुष भावनाएं व्यक्त करने में हिचकिचाते हैं, जिससे वे एक खामोश बोझ ढोते रहते हैं।” वे मानती हैं कि समाज को पुरुषों की भावनात्मक जरूरतों को लेकर नजरिया बदलना होगा। क्या आज के पुरुष अपनी भावनाएं खुलकर बता पा रहे हैं? इस सवाल पर शिवांगी कहती हैं, “अब चीजें धीरे-धीरे बदल रही हैं। कई पुरुष खुलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जजमेंट का डर अभी भी बना रहता है। उन्हें डर रहता है कि लोग उन्हें कमजोर न समझ लें, इसी वजह से वे अपने असली जज्बात छुपा लेते हैं।” पुरुषों को किन चीजों की जरूरत है? इस पर वे कहती हैं, “उन्हें एक सुरक्षित माहौल चाहिए, ऐसे दोस्त चाहिए, जो बिना मजाक उड़ाए सुनें, परिवार चाहिए जो बातचीत को बढ़ावा दे और अगर जरूरत हो तो प्रोफेशनल मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें। थैरेपी कमजोरी नहीं, बल्कि साहस की निशानी है।” अंत में शिवांगी जोड़ती हैं, “असली ताकत अपने जज्बातों को स्वीकारने और सच्चे बनने में है। हम सभी को मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेना चाहिए।”
