मुख्यपृष्ठनए समाचारमंत्री हैं कि सुनते नहीं!..सदन की कार्यवाही से हो रहे गायब

मंत्री हैं कि सुनते नहीं!..सदन की कार्यवाही से हो रहे गायब

-कल दोनों सदनों में टालने पड़े छह ध्यानाकर्षण प्रस्ताव

-जनता की नहीं रही इन्हें सुध

सामना संवाददाता / मुंबई

विधानमंडल के दोनों सदनों में मंत्री मनमानी कर रहे हैं। सदनों में चर्चा के दौरान जनता से जुड़े कई अहम सवालों को पक्ष और विपक्ष के सदस्य जोर-शोर से उठा रहे हैं, लेकिन कई मामलों में उठाए जा रहे इन मुद्दों का जवाब देने के लिए मंत्री सदन की कार्यवाही से गायब दिख रहे हैं। मंत्रियों की इस कार्यशैली पर विपक्ष जमकर हमला कर रहा है। दूसरी तरफ विधानसभा अध्यक्ष और विधान परिषद सभापति ने विभाग से जुड़े सवालों का जवाब देने के लिए मंत्रियों को उपस्थित रहने का आदेश भी दिया है। इतना ही नहीं, खुद मुख्यमंत्री भी इसे लेकर सूचना दे रहे हैं। इसके बावजूद मंत्री हैं कि सुन ही नहीं रहे। इसी के चलते कल दोनों सदनों को मिलाकर छह ध्यानाकर्षण प्रस्तावों को टालना पड़ा है। इससे यह स्पष्ट होता नजर आ रहा है कि महायुति सरकार के मंत्रियों को जनता की कतई सुध नहीं है।
उल्लेखनीय है कि ३० जून से महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र चल रहा है। इस बीच दोनों सदनों के पक्ष और विपक्ष के सदस्य जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों और समस्याओं को उठा रहे हैं और सरकार से सवाल पूछ रहे हैं।
हालांकि, कई बार यह देखा गया है कि जब विभिन्न विभागों से जुड़ा मुद्दा सदन में उठता है तो संबंधित मंत्री उनका जवाब देने के लिए सदन में मौजूद नहीं रहते हैं। ऐसे में कई बार सदस्य नाराजगी जता चुके हैं। भाजपा के प्रवीण दरेकर ने कल सदन में कहा कि विधान परिषद सभापति तीन बार आदेश दे चुके हैं कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने वाले सदस्यों और संबंधित मंत्रियों की सदन में उपस्थिति जरूरी है। खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इसे लेकर सख्त सूचना दे चुके हैं। इसके बावजूद ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के समय संबंधित मंत्री नहीं हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सचिन अहिर और कांग्रेस के भाई जगताप समेत कई सदस्यों ने भी इसे जोरदार से उठाया और मंत्री के आने तक सदन की कार्यवाही को स्थगित करने की मांग की। हालांकि, तब तक पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने पहुंचकर स्थिति को संभाल लिया।
विधानसभा में भी उठा यह मुद्दा
यह मुद्दा विधानसभा में भी उठा। इस बीच पीठासीन अध्यक्ष ने कहा कि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह उचित नहीं है कि जिस सदस्य का ध्यानाकर्षण प्रस्ताव है वहीं उपस्थित न हो। उसका उपस्थित रहना जरूरी है। इस पर सदस्यों ने कहा कि यह भी सही नहीं कि जिस मंत्री से जुड़ा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया जा रहा है, वहीं उपस्थिति न हो। यह एक बार नहीं, बल्कि कई बार हो चुका है।

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