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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा मीरा-भायंदर का सौंदर्यीकरण व सेल्फी पॉइंट!.. करोड़ों रुपए खर्च, फिर भी दुर्दशा का शिकार

सामना संवाददाता / भायंदर

मीरा-भायंदर रेलवे स्टेशन और शहर के कई प्रमुख स्थानों को सुंदर बनाने के उद्देश्य से मनपा प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपए की लागत से सौंदर्यीकरण परियोजनाएं लागू की गई थीं। उद्देश्य था कि शहर को एक नया आकर्षक रूप दिया जाए और नागरिक आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें। हालांकि, वास्तविक स्थिति बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। रखरखाव का अभाव, निम्न गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के आरोपों ने इन परियोजनाओं को गर्त में धकेल दिया है।
रेलवे स्टेशन परिसर में बनाई गई नई भित्तियों की चमक अब धूमिल हो चुकी है। जगह-जगह काई जम चुकी है और धूल-मिट्टी की मोटी परत दीवारों के सौंदर्य को पूरी तरह निगल चुकी है। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर सौंदर्यीकरण के नाम पर किए गए घटिया स्तर के निर्माण कार्य अब टूटे-फूटे दिखाई देते हैं। जो कार्य करोड़ों खर्च कर किया गया, वह कुछ ही वर्षों में जर्जर अवस्था में वैâसे पहुंच गया, यह सबसे बड़ा प्रश्न है।
हर सेल्फी पॉइंट पर लाखों खर्च
इसी प्रकार नगरसेवक निधि से शहर के विभिन्न इलाकों में सेल्फी पॉइंट स्थापित किए गए। प्रत्येक सेल्फी पॉइंट पर १५ से २५ लाख रुपए तक की धनराशि खर्च की गई। जानकारों के अनुसार, यह लागत वास्तविक जरूरतों और बाजार दरों की तुलना में अत्यधिक बताई जा रही है। निर्माण के समय इन परियोजनाओं पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने विरोध जताया था। उनका कहना था कि शहर में पानी, सड़कों, स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई जैसी मूलभूत समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं। ऐसे में दिखावे पर खर्च करना जनता के साथ अन्याय है।
गंदगी और अतिक्रमण की भरमार
आज हालात यह हैं कि जिन सेल्फी पॉइंट को शहर की शोभा बढ़ानी थी, वहां अब कचरा, गंदगी और अतिक्रमण देखने को मिल रहा है। कई जगह लोग इन्हें सेल्फी लेने की जगह सामान रखने या बैठने के स्टैंड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। पूरा प्रोजेक्ट अपने उद्देश्य और असल पहचान को खो चुका है।

‘जनता की जरूरतों को दरकिनार कर दिखावे पर करोड़ों उड़ाए गए और आज इन कार्यों की हालत किसी खंडहर से कम नहीं है।’
-रवि मिश्रा, सामाजिक कार्यकर्ता

‘यह स्मार्ट सिटी बनाने का ढोंग है। जनता की गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ का हिसाब तो देना ही पड़ेगा। यदि करोड़ों का सार्वजनिक धन शहर के विकास और जनकल्याण के बजाय केवल कागजों पर खर्च दिखाने के लिए उपयोग किया जाएगा, तो परिणाम ऐसे ही होंगे। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस विफलता की जिम्मेदारी कब और वैâसे स्वीकार करते हैं।’
-जय ठाकुर, प्रवक्ता कांग्रेस मीरा-भायंदर

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