जेदवी / मुंबई
एमएमआरडीए का दावा है कि ३४ चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे और मेट्रो के बीच की दूरी को ५० से १०० मीटर के भीतर लाया जाएगा। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण की एकीकृत परिवहन योजना भले ही कागजों पर मुंबई की यातायात तस्वीर बदलने का दावा कर रही हो, लेकिन २०२६ में भी कई अहम परियोजनाएं अब तक अंतिम चरण से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। मेट्रो और लोकल रेलवे के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी का सपना अभी भी यात्रियों के लिए अधूरा ही बना हुआ है। अंधेरी स्टेशन पर मेट्रो लाइन ७ और मेट्रो लाइन १ को रेलवे स्टेशन से जोड़ने के लिए स्काईवॉक और नए फुटओवर ब्रिज का काम लंबे समय से अंतिम चरण में बताया जा रहा है। बावजूद इसके रोजाना लाखों यात्रियों को अब भी सड़क पार करने और भीड़भाड़ से जूझने को मजबूर होना पड़ रहा है।
घाटकोपर में सुधार, लेकिन दबाव कम नहीं
घाटकोपर स्टेशन पर मेट्रो लाइन और मध्य रेलवे के बीच नया चौड़ा फुटओवर ब्रिज और अतिरिक्त एस्केलेटर शुरू कर दिए गए हैं। इसके बावजूद पीक ऑवर्स में भीड़ की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बनी हुई हैं।
५०-१०० मीटर का लक्ष्य, हकीकत दूर
एमएमआरडीए का दावा है कि ३४ चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे और मेट्रो के बीच की दूरी को ५० से १०० मीटर के भीतर लाया जाएगा। हालांकि, यह लक्ष्य अभी भी अधिकतर स्टेशनों पर योजना और कागजी अपडेट तक ही सीमित दिखाई देता है।
दहिसर इंटरचेंज: विस्तार की योजना, इंतजार बढ़ा
दहिसर में मेट्रो लाइन २A और लाइन ७ का सीधा एकीकरण भल्ो ही शुरू हो चुका हो, लेकिन मेट्रो लाइन ९ से जोड़ने के लिए प्रस्तावित नए इंटरचेंज और कनेक्टिंग आर्म्स अभी निर्माणाधीन ही हैं। मीरा-भायंदर और उत्तर मुंबई के यात्रियों को जिस राहत का वादा किया गया था, वह फिलहाल भविष्य के भरोसे है।
