मां का मतलब

मां का मतलब घर होता है,
घर का मतलब मां होती है।
घर-रिश्ते हैं देह के जैसे,
मां ही असल में जान होती है।।
पीर पराई भी मां समझे,
समझे घर का हर कोना-कोना।
एक बार पुचकारे जब भी,
भागे तन-मन से जादू-टोना।।
मां के आंचल में न जाने कितनी,
दुआ-दुआ-दुआ होती है।
मां का मतलब घर होता है,
घर का मतलब मां होती है।।
बेलन-संडसी-चिमटा-मुक्का,
हथियार सदा सोभे मईया।
अंग-अंग ऊर्जित होता है,
जब-जब गलती पर धोवे मईया।।
कितना भी हम गलती कर लें,
हर हाल में माफ सजा होती है।
मां का मतलब घर होता है,
घर का मतलब मां होती है।।
मां दिव्य तेज से ओत-प्रोत,
जिम्मेदारी में सदा है डॉक्टरेट।
मां निर्भयता का वर देती है,
समझते नहीं कुछ इलिटरेट।।
यह ज्ञान जरूरी है सबको कि,
मां अंतस में धड़कती जान होती है।
मां का मतलब घर होता है,
घर का मतलब मां होती है।।
-सिद्धार्थ / गोरखपुरी

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