जेदवी / मुंबई
-देरी ने बढ़ाया खर्च, जनता ने भुगता जाम का दर्द
-२०९ करोड़ रुपए की परियोजना पहुंची २४८ करोड़ रुपए तक
गोरेगांव और राम मंदिर क्षेत्र के लाखों नागरिकों को वर्षों तक ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित यातायात का सामना करानेवाली मृणाल ताई गोरे फ्लाईओवर विस्तार परियोजना आखिरकार शनिवार, ६ जून को जनता के लिए खोल दी जाएगी। हालांकि उद्घाटन से पहले ही इस परियोजना पर देरी और बढ़ती लागत को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
करीब ७५० मीटर लंबे और चार लेन वाले इस फ्लाईओवर विस्तार का निर्माण कार्य वर्ष २०१९ में शुरू हुआ था। दावा किया गया था कि परियोजना तय समय में पूरी होगी, लेकिन कोविड महामारी, डिजाइन में बदलाव और तकनीकी अड़चनों का हवाला देते हुए काम लगातार लटकता रहा। नतीजा यह रहा कि जिस परियोजना से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद थी, वह वर्षों की देरी के बाद पूरी हो सकी।
देरी का असर केवल समय तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती तौर पर २०९ करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना अब बढ़कर २४८ करोड़ रुपए तक पहुंच गई है। यानी देरी और बदलावों का सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ा, जबकि वर्षों तक ट्रैफिक जाम की परेशानी आम नागरिकों ने झेली।
फ्लाईओवर के शुरू होने के बाद राम मंदिर और गोरेगांव के बीच यात्रा का समय ३० से ४० मिनट से घटकर करीब ५ मिनट होने की उम्मीद है। साथ ही वाहन चालकों को एसवी रोड के तीन प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों से भी राहत मिलेगी। यह मार्ग वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और पश्चिमी उपनगरों के बीच संपर्क को अधिक सुगम बनाएगा।
प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मृणाल ताई गोरे फ्लाईओवर विस्तार परियोजना २०१९ में शुरू हुई थी, लेकिन कोविड, डिजाइन बदलाव और तकनीकी अड़चनों के कारण इसमें वर्षों की देरी हुई। २०९ करोड़ रुपए की अनुमानित लागत अब बढ़कर २४८ करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। देरी और बढ़ते खर्च ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
