-मुफ्त स्वास्थ्य सेवा और गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधा बढ़ाने की मांग
-कई स्वास्थ्य संगठनों ने १७ प्रमुख मांगों का घोषणापत्र किया जारी
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबईकरों को चूना लगानेवाली मनपा से नाराज लोगों ने मनपा चुनाव से पहले अपनी कई मांगों को लेकर आवाज उठाई है। मुंबई निवासियों ने स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार घोषित करने की अपनी मांग को तेज कर दिया है और सभी के लिए सम्मानजनक, सुलभ और मुफ्त स्वास्थ्य सेवा की मांग की है। जन स्वास्थ्य अभियान सहित कई नागरिक समूहों और स्वास्थ्य अधिकार संगठनों ने स्वास्थ्य संबंधी १७ प्रमुख मांगों को रेखांकित करते हुए एक विस्तृत घोषणापत्र जारी किया है।
इस घोषणापत्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का कड़ा विरोध किया गया है और सभी नागरिक स्वास्थ्य सुविधाओं में मुफ्त दवाओं और निदान परीक्षणों की पूर्ण गारंटी की मांग की गई है। प्रमुख मांगों में मनपा द्वारा संचालित स्वास्थ्य सुविधाओं में सभी उपयोगकर्ता शुल्कों को समाप्त करना और उपचार के लिए कार्ड या दस्तावेजों की आवश्यकता को खत्म करना शामिल है। समूहों ने जोर दिया है कि सार्वजनिक अस्पताल और सेवाएं सार्वजनिक नियंत्रण में रहनी चाहिए और पीपीपी आधारित निजीकरण मॉडल को बंद किया जाना चाहिए।
बजट और मातृ स्वास्थ्य देखभाल की मांगें
अन्य प्रमुख मांगों में ट्रस्ट के अस्पतालों में लगभग १,८०० बिस्तरों पर मुफ्त इलाज सुनिश्चित करना, नागरिक स्वास्थ्य बजट को कम से कम १५ प्रतिशत तक बढ़ाना (जिसे पांच वर्षों के भीतर २५ प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा) और गर्भवती महिलाओं के लिए कम से कम चार गृह-यात्राओं के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना शामिल है। घोषणापत्र में १०० प्रतिशत टीकाकरण कवरेज और आंगनवाड़ियों तथा पोषण कार्यक्रमों के विस्तार पर भी जोर दिया गया है।
नागरिक अस्पतालों के विस्तार की मांग
घोषणापत्र में मनपा के प्रमुख अस्पतालों की संख्या बढ़ाने और उपचार के लिए पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करने और बाहरी संस्थानों से दवाएं या परीक्षण कराने की प्रथा को समाप्त करने की मांग की गई है। उन्होंने आवासीय क्षेत्रों से ५ से २० मिनट की दूरी के भीतर प्रसूति गृह, बुनियादी शल्य चिकित्सा सेवाएं और विशेषज्ञ ओपीडी के साथ-साथ प्रति पांच लाख जनसंख्या पर एक उपनगरीय अस्पताल की भी मांग की है।
