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मुंबईकरों को कुत्तों का टेंशन!

समय पर नसबंदी नहीं हुई तो ५ लाख होगी आवारा कुत्तों की फौज

द्रुप्ति झा / मुंबई

मुंबई की सड़कों, गलियों और झुग्गियों में कदम रखना अब खतरे से खाली नहीं रह गया है। शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते झुंड और उनकी अनियंत्रित आबादी ने मुंबईकरों की रातों की नींद उड़ा दी है। मनपा के हालिया कुत्तों की जनगणना के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और डराने वाले हैं। मनपा की लापरवाही के कारण मुंबई के सिर पर अब एक नया डॉग बम फूटने के कगार पर है। डराने वाले आंकड़ों से मुंबई में कुत्तों का आतंक नजर आ रहा है। मनपा के सर्वे के अनुसार, इस समय मुंबई की सड़कों पर करीब ९०,७५७ आवारा कुत्ते घूम रहे हैं। हालांकि मनपा का दावा है कि उन्होंने १९९४ से लेकर अगस्त २०२५ तक ४,३४,५२९ कुत्तों की नसबंदी की है और शहर के ६२.९ प्रतिशत कुत्तों की नसबंदी हो चुके है, लेकिन असली चिंता की बात वो आंकड़ा है जो अभी भी मनपा की पकड़ से दूर है।
अभी भी ३० हजार से ज्यादा कुत्तों की बाकी है नसबंदी
शहर में अभी भी ३३,६७१ ऐसे कुत्ते हैं जिनकी नसबंदी होना बाकी है। इन कुत्तों में २२,४४७ नर और ११,२२४ मादा कुत्ते शामिल हैं। मनपा के पशु स्वास्थ्य विभाग ने खुद यह भयानक अनुमान लगाया है कि यदि इन ११,२२४ मादा कुत्तों की नसबंदी तुरंत नहीं की गई, तो अगले कुछ ही सालों में मुंबई में आवारा कुत्तों की आबादी चार गुना बढ़कर ४.४८ लाख (साढ़े चार लाख के करीब) पहुंच जाएगी, अगर ऐसा हुआ तो मुंबई की सड़कों पर चलना दूभर हो जाएगा। मुंबई में आज जो जगह-जगह आवारा कुत्तों के खूंखार झुंड दिखाई दे रहे हैं, उसके पीछे सीधे तौर पर मनपा की सुस्ती और लापरवाही जिम्मेदार है। पिछले कुछ सालों में नसबंदी के अभियान में कोई निरंतरता नहीं रही। मुंबई के उत्तरी इलाकों विशेषकर मालाड, कांदिवली और आर-सेंट्रल वार्ड में नसबंदी की रफ्तार बेहद शर्मनाक रही है। इन इलाकों में ५० प्रतिशत से भी कम कुत्तों की नसबंदी हुई है। यही कारण है कि इन उपनगरों की सोसायटियों, मोड़ों और कचरा कुंडियों के पास कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड जमा रहते हैं, जो राहगीरों, बच्चों और बुजुर्गों पर हमला करने के लिए तैयार बैठते हैं।
उपनगरों में सबसे ज्यादा खतरा
मालाड, कांदिवली और आर-सेंट्रल वार्ड में नसबंदी अभियान सबसे कमजोर रहा है। कई इलाकों में ५० प्रतिशत से भी कम कुत्तों की नसबंदी हुई है। नतीजतन, सड़कों, सोसायटियों और कचरा स्थलों के आसपास आवारा कुत्तों के झुंड लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों में डर है।

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