-पेड़ काटने की अनुमति वापस लेने की दी चेतावनी
-नए वृक्ष लगाने पर सरकार ने नहीं दिया ध्यान
११ नवंबर से पहले हलफनामा दायर करने का निर्देश
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई का पर्यावरण खतरे में है। महायुति सरकार की अकर्मण्यता के चलते दिनोंदिन मुंबई में प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए नई परियोजनाओं के लिए पेड़ काटने की अनुमति को वापस लेने की चेतावनी दे डाली है।
दरअसल, नई परियोजनाओं के लिए काटे गए पेड़ों के स्थान पर नए वृक्षारोपण का कार्यान्वयन काफी धीमा है। इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महायुति सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मुंबई मेट्रो रेल और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड जैसी परियोजनाओं के लिए पेड़ों की कटाई की सभी पूर्व अनुमतियां वापस ले ली जाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर इस संबंध में ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्य सरकार के प्रमुख अधिकारियों को ११ नवंबर से पहले हलफनामा दाखिल करने को कहा है। पीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मुंबई में वृक्षारोपण पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अदालत ने कहा कि मुंबई जैसे महानगर में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना ‘देश के विकास’ के साथ-साथ उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके बाद राज्य सरकार के वकीलों और संबंधित अधिकारियों ने संशोधित हलफनामा दाखिल करने के लिए ११ नवंबर तक का समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट की पीठ मनपा की एक नई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना के लिए पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई थी। हालांकि, इसके लिए नए पेड़ लगाने की शर्त रखी गई थी।
१,००० पेड़ काटने हैं
१४ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने मनपा को इस परियोजना के लिए ९५ पेड़ काटने की अनुमति दी थी। वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि गोरेगांव-मुलुंड लिंक परियोजना के लिए १,००० से ज्यादा पेड़ काटने होंगे। इनमें से ६३२ पेड़ों को ‘स्थानांतरित’ किया जाएगा। साथ ही, ४०७ पेड़ों को स्थायी रूप से काटना होगा।
