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महायुति में ‘मुंगेरी’ मचमच … चुनाव का ठिकाना नहीं, महापौर बनाने की लड़ाई शुरू!

धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
मुंबई मनपा चुनाव से पहले महायुति में ‘मुंगेरी’ मचमच शुरू हो गई है। अभी चुनाव का ठिकाना नहीं है और सरकार में शामिल तीनों पक्ष महापौर को लेकर भिड़ गए हैं और ‘मेरा महापौर तो मेरा महापौर’ की लड़ाई शुरू हो गई है।
बता दें कि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण के ‘महापौर हमारा’ दावे पर शिंदे गुट ने सीधी चोट करते हुए कहा है कि चव्हाण के बयान की उनकी नजर में कोई औकात नहीं है। शिंदे गुट के मंत्री का यह विस्फोटक हमला सामने आते ही महायुति के भीतर का तनाव और गहरा हो गया है। उधर अजीत पवार गुट भी पूरे दमखम के साथ मैदान में उतर चुका है, जिससे तीनों दलों के बीच जबरदस्त शक्ति-परीक्षण का माहौल बन गया है।
उल्लेखनीय है कि मुंबई मनपा चुनाव अभी घोषित नहीं हुए हैं, फिर भी महापौर पद को लेकर महायुति के भीतर तकरार शुरू हो गई है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने दावा किया कि मुंबई में महायुति की सत्ता आएगी और महापौर भाजपा का ही होगा। हालांकि, चव्हाण के इस बयान के बाद शिंदे गुट के तीखे पलटवार ने महायुति की आंतरिक मचमच पूरी तरह उजागर कर दी है। भाजपा के दावे पर सीधे सवाल उठाते हुए शिंदे गुट ने संकेत दिया है कि अंतिम पैâसला सत्ता समीकरणों के शीर्ष स्तर पर ही होगा। दूसरी ओर अजीत पवार गुट भी अपने राजनीतिक वजन के बूते निर्णायक भूमिका चाह रहा है। तीनों दलों की यह सीधी भिड़ंत न केवल महायुति की एकजुटता पर प्रश्नचिह्न खड़े करतीं है, बल्कि मुंबई मनपा की सत्ता के लिए होने वाली टक्कर को और ज्यादा विस्फोटक बनाती है।
चव्हाण का बयान महत्वहीन
भाजपा द्वारा महापौर पद का दावा किए जाने के बाद शिंदे गुट के संजय शिरसाट ने चव्हाण पर पलटवार किया। उन्होंने कहा मुंबई मनपा के महापौर पद को लेकर रवींद्र चव्हाण के बयान को हम ज्यादा महत्व नहीं देते। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्री लेंगे। जब तक महायुति पक्का नहीं होता, तब तक इस तरह की बातों पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। यदि संभव हुआ तो चुनाव गठबंधन में ही लड़ना है। जब तक गठबंधन नहीं होता, हम इसे गंभीरता से नहीं लेंगे।

महायुति में बढ़ता तनाव
अजीत पवार गुट भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को उत्सुक है। ऐसे में महायुति के तीनों सहयोगी महापौर पद पर अपना दावा मजबूत करने की कोशिशों में जुटे हैं। चुनाव की घोषणा से पहले ही महायुति में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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