सूफी खान
अमेरिका इस बार खाली हाथ रह गया या यूं कहें कि हाथ मलता रह गया। जी हां, ईरान के लिए अमेरिका को और सब्र करना होगा। ईरान में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों और वहां की सरकार द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की जा रही सख्ती के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य हमले के स्पष्ट संकेत दिए थे और ऐसा लग भी रहा था कि इस बार अमेरिका इस मौके को हाथ से जाने नहीं देगा, लेकिन ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों ने फिलहाल राष्ट्रपति को धैर्य रखने और तैयारी के लिए और समय देने की सलाह दी है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के पास हजारों की संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हैं। यदि अमेरिका हमला करता है तो इराक, कतर, यूएई और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरान के आसान लक्ष्य बन जाएंगे। सेना इन ठिकानों पर एयर डिफेंस सिस्टम को और मजबूत करने के लिए समय चाहती है। खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी हमले की सूरत में ईरान का पहला निशाना इजरायल हो सकता है। अमेरिकी एजेंसियों का मानना है कि इजरायल को सुरक्षा कवच प्रदान करने और उसके साथ तालमेल बिठाने के लिए और अधिक समय और संसाधनों की तैनाती की जरूरत है। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि सीआईए और अन्य एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इस समय बाहरी हमला ईरान के प्रदर्शनकारियों के लिए घातक हो सकता है। विदेशी हमला ईरानी जनता में ‘राष्ट्रवाद’ की लहर पैदा कर सकता है, जिससे लोग अपनी सरकार के खिलाफ लड़ने के बजाय विदेशी दुश्मन के खिलाफ एकजुट हो सकते हैं। इससे खामेनेई शासन को इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार देने का मौका मिल जाएगा।
पेंटागन का दावा है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या स्ट्रेट ऑफ हुर्मुज को बंद कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। इसकी सुरक्षा के लिए नौसैनिक जहाजों की अतिरिक्त टुकड़ियों की आवश्यकता है। इसके अलावा अमेरिकी नेता भी मान रहे हैं कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई से वहां की जनता अमेरिका के खिलाफ तो होगी ही साथ ही सरकार के विरोध में जो आवाज उठी है वो समर्थन में बदल सकती है। १९५३ में भी अमेरिका और ब्रिटेन मिलकर ईरान में मोहम्मद मोसादेक की चुनी हुई सरकार का तख्तापलट तो कर दिया था। लेकिन जनता में असंतुष्टि की लहर बनी रही और लगभग तीस साल बाद इस्लामिक क्रांति के रूप भी फिर नजर आई। यानी कुल मिलाकर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के साथ सीनेटर भी ईरान पर संभावित हमले को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका को इसमें बड़ा नुकसान भी हो सकता है। अब ईरान में इस्लामिक इंकलाब की सबसे मजबूत ढाल को भी मैदान में उतार दिया गया है। हम बात कर रहे हैं रहबर के बसीजी की…जी हां, बसीजी… जैसे ही जुमे के बाद नमाजे जुमा ईरान में ईमाम खामेनेई ने एलान किया कि उनका मुल्क किसी के आगे झुकेगा नहीं।
