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मुस्लिम वर्ल्ड : पिटने के डर से हां-न कर रहा अमेरिका!..सऊदी को क्यों टाल रहे ट्रंप?

बम लदे थे, फाइटर जेट तैयार थे और टारगेट भी। फिर अचानक यमन के अंसारुल्लाह से भिड़ने में अमेरिका ने हाथ पीछे खींच लिए। अमेरिका के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप यमन में हूती ठिकानों पर हमला करने से ठीक पहले पीछे हट गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप यमन में ईरान के समर्थन वाले हूती ठिकानों पर हमला करने वाले थे। इसके लिए सेना पूरी तरह तैयार थी, लेकिन ट्रंप ने अचानक हमले से इनकार कर दिया।
वो भी सऊदी अरब की अपील के बाद ट्रंप ने अपना फैसला बदला और फिलहाल हमले रोकने का मन बनाया। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला ट्रंप के लिए मुश्किल बन गया है। सऊदी अरब अमेरिका से मदद मांग रहा है, लेकिन ट्रंप अपने फैसले पर हूतियों के मामले में दाएं-बाएं हो जाते हैं। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद ने आगे बढ़ रहे हूतियों के खिलाफ मदद की फिर से अपील की। इस अपील से एक दिन पहले ट्रंप सलाहकारों से मिले थे और नहीं चाहते थे कि यमन में हूतियों से अमेरिका भिड़े।
लेकिन क्राउन प्रिंस सलमान से बात के बाद उन्होंने पेंटागन को हवाई हमलों की तैयारी का आदेश दे दिया था फिर बाद में पैâसला बदल लिया। ट्रंप के यू-टर्न से सस्पेंस बढ़ गया कि आखिर उनके मन में चल क्या रहा है। दूसरी ओर खबर है कि ट्रंप के कई सलाहकार हूतियों के खिलाफ सऊदी अभियान में शामिल होने के खिलाफ थे। अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वो ईरान के साथ बड़ी जंग पर फैसला लेने की स्थिति में हैं। हूतियों के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका उनसे बात कर रहा है और हूतियों ने अभी तक अमेरिका से न लड़ने पर सहमति जताई है। गौरतलब है कि यमन के अंसारुल्लाह ने अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं किया है, लेकिन सऊदी अरब को निशाना बनाया और लगातार बना रहा है। अब अमेरिका की मजबूरी है कि सऊदी के साथ अपने रिश्तों को भी बैलेंस करे।
देखा जाए तो चप्पल पहनकर घूमने वाले इन लड़ाकों से पहले अमेरिका भी तौबा कर चुका है। पहले अमेरिका हूतियों से लड़कर देख चुका है, आखिर में उसे समझौता करना पड़ा था। अंसारुल्लाह ईरान के दोस्त हैं और ईरान की सुनते हैं। मिडिल ईस्ट एक्पर्ट कहते हैं कि यही वजह है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल जंग में जान बूझकर सऊदी की एंट्री करवाई गई है, ताकी यमन के इन हूती लड़ाकों को इंगेज रखा जाए। लेकिन यहां पांसा उलटा पड़ गया है। हूतियों ने सऊदी की हालत खराब करना शुरू कर दिया है। अंसारुल्लाह ने सऊदी की तेल की ‘नस’ दबाई और अब सऊदी की ‘रीढ़’ तोड़कर मानेंगे हूती। अमेरिका थोड़ी बहुत मदद करके क्या सऊदी को हार झेलते यूं ही देखता रहेगा, ये बड़ा सवाल है।

सूफी खान

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