-सूफी खान
यमन में भीषण जंग चल रही है। कदम-कदम पर सऊदी अरब बैक्ड फोर्सेस और अंसारुल्लाह के दर्मियान मुकाबला जारी है। मीडिया रिपोर्ट बता रही हैं कि यमन के हूती लड़ाके प्रो सऊदी हुकूमत की राजधानी अदन से सिर्फ ८० किलोमीटर दूर रह गए हैं और हर घंटे ये दूरी भी कम हो रही है। गौरतलब है कि साल २०१५ में जब से अंसारुल्लाह ने यमन की राजधानी सना पर कंट्रोल हासिल किया है और वहां से अपनी सरकार चला रहे हैं, तब से सऊदी हिमायती हुकूमत के हेडक्वार्टर को अदन ट्रांसफर कर दिया गया था।
अब हूतियों की इस ताजा बढ़त से सऊदी अरब की हिमायत वाली यमन की सरकार पर खतरा मंडराने लगा है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि हूती विद्रोही अदन शहर के ८० किमी के दायरे तक पहुंच गए हैं। मिडिल ईस्ट एक्सपर्ट कहते हैं कि देखा जाए तो हूतियों ने यमन करीब-करीब फतेह कर लिया है। आसमान से सऊदी बमबारी के बीच ये जीत किसी चमत्कार से कम नहीं। अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते में ही यमन में तायज शहर पर कब्जे को लेकर सऊदी बैक्ड फोर्सेज़ और हौसी मिलिशिया के बीच बड़ी और लंबी लड़ाई हुई थी। लेकिन अंसारुल्लाह यानी हौसी लड़ाकों ने तायज शहर पर कब्जा कर तायज को अदन से जोड़नेवाली अहम सप्लाई रोड काट दी। तायज पर हौसियों या अंसारुल्लाह की बढ़त सऊदी बैक्ड फोर्सेज के लिए बड़ा झटका थी, क्योंकि तायज साउथ-वेस्ट यमन का स्ट्रैटेजिक गेटवे है। तायज की ऊंचाइयों से अदन की तरफ जाने वाले अहम रास्तों और सप्लाई रूट पर हौसियों का कब्जा हो गया था और अब करीब २५ दिन बाद वो तायज से अदन की तरफ महज ८० किलोमीटर पीछे हैं।
हूती-सऊदी जंग पर करीब से नजर रख रहे एक्सपर्ट कहते हैं कि मारीब, ताइफ और अदन अंसारुल्लाह के कंट्रोल में आए तो खेल खत्म। इसके बाद तो यमन का ज्यादातर इलाका रेगिस्तान है वो किसी के कंट्रोल में रहे फर्क नही पड़ता। तायज पर पकड़ मजबूत होने का मतलब ही यह था कि अदन और साउथ में मौजूद सऊदी बैक्ड फोर्सेज की कनेक्टिविटी पर सीधा असर। इसके अलावा तायज गवर्नरेट का रिश्ता मोखा और लाल सागर के तट से है, इसलिए इसकी अहमियत सिर्फ जमीनी लड़ाई तक सीमित नहीं है।
तायज और अदन की पहाड़ियों पर बरसों से लड़ाई की ट्रेनिंग लिए बैठे सऊदी हामी गुटों के हमले, आसमान से सऊदी एयरफोर्स के हमलों के बीच जमीन से आगे बढ़ते हौसी लड़ाकों ने सऊदी बैक्ड लड़ाकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। कुछ वीडियो में कुछ दिनों पहले ही दुनिया ने देखा था कि ताइज से अदन को जोड़ने वाली तायज अदन रोड के एक चौराहे पर हौसी लड़ाकों का कब्जा है और उनकी गाड़ियां दौड़ रही हैं। हालांकि, सऊदी के समर्थन वाला गठबंधन हूती ठिकानों पर हमला कर रहा है। सऊदी अरब के लड़ाकू विमान यमन में हूतियों के नियंत्रण वाले इलाके में बमबारी कर रहे हैं। जवाब में हूतियों ने भी सऊदी के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं। इधर, प्रो सऊदी फोर्सेस का भी दावा है कि उन्होने यमन के लाहिज स्टेट पर हूतियों के कब्जे से कुछ इलाकों को वापस ले लिया है।
बहुत से एक्सपर्ट कहते हैं कि सऊदी के पास चारा नहीं है, अब बात ही करना पड़ेगा अंसारुल्लाह से। जंग में इन्हें नहीं जीता जा सकता… जमीनी जंग में तो बिल्कुल भी नही। जानकार कहते हैं कि कई सालों से पश्चिमी मीडिया ने यह तस्वीर बनाकर यमन की पेश की कि वहां एक असली सरकार है और हूती उसके विद्रोही हैं, जबकि हकीकत इससे उलट है। यमन में सरकार हूतियों या अंसारुल्लाह की है जिसमें और भी बहुत सारे ग्रुप्स हैं, जिसे वहां नेशनल साल्वेशन गवर्नमेंट या हुकूमत-ए-निजात-ए-मिल्ली कहा जाता है जमीनी जंग में तो यही दिख रहा है।
