सूफी खान
पिछले साल कुवैत में आग लगने के हादसे के बाद ४२ हिंदुस्थानियों की मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया था। इसके साथ ही ये बहस भी शुरू हो गई कि आखिर इतने सारे लोग कफील सिस्टम के चंगुल में वैâसे फंस जाते हैं। बड़ी तादाद में भारतीय मजदूर आखिर क्यों गल्फ देशों में मुश्किल हालात में रहने पर मजबूर हैं? अब सऊदी अरब की हुकूमत ने इस कफाला सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर दिया है और वहां काम करनेवाले वर्कर्स के लिए कुछ ऐसी राहत दी है, जिससे वो कानून का लाभ उठाकर अपना हक हासिल कर सकेंगे।
सऊदी अरब के हालिया श्रम सुधारों ने कफाला सिस्टम की जगह कॉन्ट्रैक्ट एंप्लॉयमेंट मॉडल को लागू कर दिया है। नए सिस्टम में विदेशी वर्कर्स को मौजूदा कंपनी या कहें कफील की इजाजत लिए बगैर नई कंपनी ज्वॉइन करने की अनुमति होगी। यानी वो अब सऊदी में आसानी से जॉब चेंज कर सकेगा। वर्कर्स अब बिना किसी एग्जिट वीजा के देश छोड़ सकेंगे और उन कानूनी सुरक्षाओं का लाभ उठाने की इजाजत मिलेगी, जो पहले मुहैया नहीं थे। अब भारत और अन्य देशों से जानेवाले मुलाजिमों को वहां जॉब करना आसान हो जाएगा। अरबी लफ्ज कफील का अर्थ है जमानत लेने वाला या जिम्मेदारी लेने वाला।
अरबी में इसे कफाला और अंग्रेजी में ‘स्पॉन्सरशिप’ के तौर पर ये सिस्टम जाना जाता है। सऊदी अरब, कतर, कुवैत, जॉर्डन जैसे देशों में कफाला सिस्टम आम है। इसके तहत विदेशी वर्कर्स का कानूनी स्टेटस सीधे तौर पर उसकी कंपनी या कफील से जुड़ा होता था। कफाला सिस्टम से बंधा वर्कर ना तो जॉब बदल सकता था, ना कंपनी की इजाजत लिए बगैर देश छोड़ सकता था और ना ही उसे कानूनी मदद मिल सकती थी। एक तरह की मजबूरी के तहत उसे काम करना पड़ता था। कई बार जॉब में मन ना लगे या अपने देश वापस लौटने की इच्छा हो तब भी कफील की मर्जी अहम हो जाती थी क्योंकि पासपोर्ट कफील के पास रहता था।
इस सिस्टम को इसलिए डिजाइन किया गया था, ताकि विदेशी वर्कर की कानूनी और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे कंपनी या उस शख्स को सौंप दी जाए, जहां वह काम करने आ रहा है। आसान भाषा में कहें तो वर्कर की जिम्मेदारी कफील के हाथ में होती थी। कफाला सिस्टम से राज्य की नौकरशाही पर दबाव नहीं पड़ता था, क्योंकि सारा काम खुद कफील को देखना होता था। समय के साथ इस सिस्टम की आलोचना होने लगी, क्योंकि इसकी वजह से वर्कर्स के मानवीय अधिकारों का हनन होता था। कई बार उन्हें गुलामों जैसा जीवन जीने पर मजबूर कर दिया जाता था। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की पहल पर कफाला सिस्टम वहां पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन यूएई, कतर, ओमान, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में ये अब भी काम कर रहा है, सऊदी के बाद वहां भी सरकारों पर इसे खत्म करने का प्रेशर बनेगा।
