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मुस्लिम वर्ल्ड : इजरायल की एक नहीं सुनी! …तुर्की को क्या तोहफा दे रहे ट्रंप?

सूफी खान
इजरायल में एक नई थ्योरी बन रही है। वहां यह बात कही जाने लगी है कि ईरान की तुलना में रजब तैयब एर्दोगान का तुर्की, इजरायल के लिए ज्यादा बड़े खतरे बन सकते हैं। वैसे भी तुर्की और इजरायल के बीच ताल्लुकात काफी खराब होते जा रहे हैं। एक्सपर्ट कहते हैं कि इजरायल को खित्ते में एक न एक दुश्मन चाहिए ही चाहिए, ऐसे में अमेरिका से जो खबर आई है वो इजरायल के लिए बहुत बड़ा झटका है। दरअसल, ट्रंप ने मीडिया के सामने साफ कह दिया है कि तुर्की के प्रेसिडेंट रजब तैयब एर्दोगान मेरे दोस्त हैं। ईरान अमेरिका-इजरायल जंग से जानबूझकर एर्दोगान ने खुद को दूर रखा। ट्रंप ने बताया है कि एर्दोगान इजरायल के खिलाफ हैं। चाहते तो वो ईरान के साथ इजरायल पर हमला कर सकते थे, लेकिन क्यों कि रजब तैयब एर्दोगान मेरे दोस्त हैं इसलिए उन्होंने इजरायल पर अटैक नहीं किया। ट्रंप ने नेतन्याहू को सीधा इशारा भी दे दिया कि इजरायल को तुर्की से खतरा है। दरअसल, तुर्की में नाटो की एक मीटिंग होने जा रही है। उसमें ट्रंप भी शिरकत कर रहे हैं। अमेरिकी मीडिया ने ट्रंप से पूछा कि क्या आप तुर्की के लिए कोई गिफ्ट लेकर जा रहे हैं तो ट्रंप ने यह कहकर मीडिया और अमेरिका के नेताओं को भी चौंका दिया है कि मैं तुर्की के लिए एफ-११० फाइटर जेट का इंजन और अमेरिकी एफ-३५ जेट लेकर जा रहा हूं। माना जाता है कि तुर्की को इजरायल से सीधा खतरा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को ७०० मिलियन डॉलर यानी करीब ५,८०० करोड़ रुपए से अधिक के फाइटर जेट के इंजन बेचने की मंजूरी दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब तुर्की की एयरफोर्स अपने आधुनिकीकरण के लिए संघर्ष कर रही है। अमेरिकी सांसद तुर्की के साथ रक्षा सौदे को लेकर विरोध जता रहे हैं, लेकिन ट्रंप अपने दोस्त एर्दोगान के लिए अड़ गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि तुर्की के प्रेसिडेंट रजब तैयब एर्दोगान का लक्ष्य तुर्की को डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाना है। इसी के तहत २०१६ में तुर्की ने स्वदेशी ५वीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था, जिसे ‘कान’ नाम दिया गया है। उसके इंजन सिर्फ अमेरिका से ही मिल सकते हैं। अभी तुर्की की एयरफोर्स अमेरिकी एफ-१६ लड़ाकू विमानों और बायरकतार जैसे घरेलू ड्रोन पर निर्भर है। तुर्की के कान फाइटर जेट की सबसे बड़ी खासियत ‘सुपरक्रूज’ है। यानी बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक उड़ान भर सकता है, जो इसे रडार की पकड़ से दूर रखने और ईंधन बचाने में मदद करती है। इसमें स्टिल्थ तकनीक है इसके हथियारों को बाहरी हिस्से के बजाय ‘इंटरनल वेपन बे’ में रखा जाता है, जिससे यह दुश्मन के रडार पर दिखाई नहीं देता। वहीं, इजराइल लंबे समय से वॉशिंगटन में लॉबिंग कर रहा है कि तुर्की को एफ-३५ न मिले। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले साल कहा था कि हम ये तय करेंगे कि जिन लोगों को यह ताकत नहीं मिलनी चाहिए, उन्हें यह न मिले। लेकिन तुर्की को इस जेट का इंजन देने के लिए ट्रंप बजिद हैं।

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