सूफी खान
‘कैंची’ बना देंगे यमन के हूती!
ईरान हिमायती इस्लामिक रेजिस्टेंस यानी इजरायल के खिलाफ प्रतिरोध की धुरी के एक अहम ग्रुप यमन के अंसारुल्लाह को छेड़कर ऐसा लग रहा है कि सऊदी अरब ने मुसीबत मोल ले ली है। यमन के हूतियों ने लाल सागर सऊदी के लिए बैन कर रखा है, ना सिर्फ बैन है बल्कि हमले को भी अंजाम दे रहे हैं।
अब मीडिया रिपोर्ट और सऊदी अधिकारियों के हवाले से खबर है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल एक्सपोर्टर सऊदी अरब पर एक ऐसा खौफनाक खतरा मंडरा रहा है, जो क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नींद उड़ा रहा होगा। खबर है कि ईरानी रेजिस्टेंस के ग्रुप जिन्हें मुकावमत भी कहा जाता है, सऊदी पर एक साथ दो तरफ से अटैक कर सकते हैं। सऊदी अरब के नॉर्थ बॉर्डर से हशदुश्शाबी, कताइब हिजबुल्लाह, हरकत अल-नुजाबा और कताइब सय्यद अल-शुहदा जैसे तंजीमें हमला बोलेंगी और साउथ की तरफ से यमन पर कब्जा जमाए बैठे हूतियों की प्रोफेशनल आर्मी मिसाइलों, ड्रोंस और लंबी दूरी के रॉकेटों से सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल देगी।
जब सऊदी पर उत्तर और दक्षिण से एक साथ सैकड़ों ड्रोंस और मिसाइलों से हमला बोलेंगे हूती और इराक में मौजूद संगठन तो सऊदी अरब में लगा अमेरिकी डिफेंस का चक्रव्यूह टूट जाएगा। ये वैंâची की तरह काटने वाला अटैक होगा यानी दोनों सिरों से काट देना। हो सकता है कि सऊदी को पहले से इस प्लान की भनक हो, तभी तो उसने पिछले दिनों अमेरिका के साथ मिलकर इराक में हशदुश्शाबी के ठिकानों पर भीषण हमले को अंजाम दिए थे। हशदुश्शाबी जिसे इराक में पॉपुलर मोबलाइजेशन फोर्स के नाम से भी जाना जाता है।
खुफिया रिपोर्टों की मानें तो इस हमले का असली मकसद सऊदी अरब की इकोनॉमी की कमर तोड़ना और उसके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह करना है। सऊदी अरब के एक सीनियर अफसर ने एक अमेरिकी चैनल से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया था कि उन्हें खुफिया एजेंसियों से मल्टीपल कोऑर्डिनेटेड अटैक की कई रिपोर्ट्स मिली हैं। इन रिपोर्ट्स में साफ कहा गया है कि ये हमले आने वाले कुछ ही समय में हो सकते हैं।
दरअसल, जुलाई की शुरुआत में हूतियों के डेलीगेशन को यमन ला रहे एक प्लेन पर सऊदी अरब ने उस समय हमला किया था, जब वो ईरान से आयतुल्लाह खामेनेई के जनाजे में शामिल होकर लौट रहे थे, वो हमला तो फेल हो गया, प्लेन सुरक्षित उतर गया। लेकिन हूती सऊदी अरब के पीछे पड़ गए हैं और ये जंग बड़ी होती जा रही है। सऊदी का तर्क था कि वो ईरानी एयरलाइंस का प्लेन था इसे यमन में सऊदी के जरिए पिछले १० सालों से एयर ब्लॉकेट का उल्लंघन माना जाएगा। गौरतलब है कि सऊदी ने यमन के हूतियों के कंट्रोल वाले यमन के हिस्से पर ईरानी प्लेन और फ्लाइट्स पर एयर ब्लॉकेट लगा रखा है।
