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मुस्लिम वर्ल्ड : सबसे खतरनाक दहशतगर्दों को खदेड़ डाला!.. कौन थे नाइजीरिया के मुहम्मदू बुहारी

सूफी खान

मुस्लिम बहुल अप्रâीकी मुल्क नाइजीरिया में लगातार दो कार्यकाल पूरे करने वाले और अपने दौर में नाइजीरिया को भ्रष्टाचार की दलदल से काफी हद तक बाहर निकालकर उसे पटरी पर लाने वाले पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मदू बुहारी का इंतकाल हो गया है, वो ८२ साल के थे। उनके इंतकाल की खबर से पूरे मुल्क में गम और अफसोस की लहर दौड़ गई। सिर्फ नाइजीरिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उन्हें याद किया जा रहा है। भारत ने भी उनके निधन पर अफसोस जाहिर किया। भारत समेत दुनियाभर के नेता उनके इंतकाल पर दुखी हैं।
साल २०१५ में मुहम्मदू बुहारी ने मुस्लिम अक्सरियत वाले देश नाइजीरिया में राष्ट्रपति पद पर निर्वाचित होकर इतिहास रचा था। यह पहला मौका था, जब विपक्षी पार्टी के किसी उम्मीदवार ने शांतिपूर्वक सत्ता संभाली थी। दरअसल, १९८३ में पूर्व जनरल मुहम्मदू बुहारी ने बलपूर्वक सत्ता हासिल की थी। हालांकि, दो साल के अंदर ही तख्तापलट कर उन्हें उस समय सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। इसके बाद वे दोबारा २०१५ में चुनाव जीतकर राष्ट्रपति बने और देश की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कई वादे और उस पर अमल भी किया।
बुहारी उस समय सत्ता में आए, जब देश में बदलाव की सख्त जरूरत थी। अपहरण और बम विस्फोट की घटनाएं आम हो गई थीं। इसके लिए कट्टरपंथी दहशतगर्द तंजीम बोको हराम को जिम्मेदार ठहराया जाता है, जिसका पूर्वोत्तर नाइजीरिया के बड़े हिस्से पर कंट्रोल था।
नाइजीरिया में आत्मघाती हमलों का दौर भी शुरू हो गया था। ऐसा ही एक हमला जुलाई २०१४ में देश के उत्तरी इलाके में स्थित कडुना शहर में हुआ था। इस हमले में मोहम्मदु बुहारी को निशाना बनाया गया था। उस समय वे विपक्ष में थे। बुहारी इस हमले में बच गए, लेकिन दर्जनों लोग मारे गए थे। उस दौर में हिंसक घटनाएं चरम पर थीं। बुहारी इस क्रूरता को समाप्त करना चाहते थे। कहा जाता है कि बुहारी के दौर में नाइजीरिया को इस दहशतगर्दी से काफी हद तक निजात मिल गई थी। मुहम्मदू बुहारी ने दो कार्यकाल पूरे करने के बाद खुद पद छोड़ दिया था और कहा था टीनूबू राष्ट्रपति बने। देखा जाए तो उन्होंने खुद नाइजीरिया की कुर्सी का त्याग कर दिया था। बोको हराम जैसे दहशतगर्द संगठन को काफी हद तक नाइजीरिया से खदेड़ने में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दुख जताते हुए लिखा, ‘नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मदू बुहारी के निधन से अत्यंत दुखी हूं। मुझे मुख्तलिफ मौकों पर हुई हमारी मुलाकातें और बातचीत याद आती हैं। उनकी बुद्धिमत्ता, गर्मजोशी और भारत-नाइजीरिया मैत्री के प्रति अटूट प्रतिबद्धता अद्वितीय थी।’

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