मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : नहीं मान रहे ट्रंप! ...ईरान पर हमले का प्लान क्या?

मुस्लिम वर्ल्ड : नहीं मान रहे ट्रंप! …ईरान पर हमले का प्लान क्या?

सूफी खान

ईरान में प्रदर्शनों और वहां की सरकार के जरिए उन्हें कुचले जाने की कोशिश के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करनेवाले देशों पर २५ फीसदी टैरिफ लगाने का एलान किया है। अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अमेरिका सीधे ईरान पर हमला करेगा या दबाव की राजनीति से ही काम लेगा?
पिछले दो हफ्तों से ज्यादा समय से देश के कई बड़े शहरों में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुए ये विरोध अब सत्ता विरोधी आंदोलन का रूप लेते दिख रहे हैं। तेहरान, मशहद और इस्फहान जैसे शहरों से भारी प्रदर्शन की खबरें सामने आती रहीं। जानकारों का मानना है कि अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य कार्रवाई से बचेगा। ट्रंप की रणनीति ईरान को कूटनीतिक और आर्थिक दबाव में लाने की है, ताकि अंदरूनी हालात और कमजोर हो जाएं। लेकिन ट्रंप को चौंकाने वाली कार्रवाई के लिए जाना जाता है। ऐसे में माना ये भी जा रहा है कि ट्रंप ईरान पर भी हमले का कोई न कोई प्लान तो जरूर बना ही रहे होंगे।
कई डिफेंस एक्सपर्ट कहते हैं कि ईरान पर अमेरिका सीमित हवाई हमलों का सहारा ले सकता है। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की पैâसिलिटी, इंटेलिजेंस मिनिस्ट्री की बिल्डिंग और कमांड सेंटर को निशाना बना सकता है। इसका यह फायदा होगा कि अमेरिकी सैनिकों के लिए कम जोखिम भरा होगा, आम नागरिकों के हताहत होने की संभावना कम होगी। अगर हमला खाड़ी देशों के रास्ते होता है, तो इसके लिए अमेरिका के कई बड़े सैन्य अड्डे पहले से मौजूद हैं। कुवैत में अली अल सलेम एयर बेस और वैंâप आरिफजान हैं। वैंâप आरिफजान अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा अड्डा माना जाता है। कुवैत की ईरान से दूरी करीब २५० किमी है। इसके अलावा अमेरिका अपने एयरक्राफ्ट वैâरियर स्ट्राइक ग्रुप का इस्तेमाल कर सकता है। यूएसएस हैरी एस ट्रूमैन पहले से ही क्षेत्र में तैनात है, जबकि यूएसएस कार्ल विंसन को हाल ही में वहां भेजा गया है।
इसके अलावा अमेरिका बीटू स्टेल्थ बॉम्बर का इस्तेमाल कर सकता है, जो हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया बेस से उड़ान भर सकते हैं या फिर सीधे अमेरिका के मिसूरी से हवा में फ्यूल भरते हुए मिशन पूरा कर सकते हैं। ये बॉम्बर ईरान के रडार सिस्टम को चकमा देने में सक्षम हैं। इसके अलावा, टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जिन्हें फारस की खाड़ी में तैनात पनडुब्बियों से दागा जा सकता है। इन मिसाइलों की रेंज १६ सौ किमी से ज्यादा होती है। लेकिन कड़वी सच्चाई तो ये है कि अब तक कोई भी पावरफुल वेस्टर्न कंट्री ईरान पर अटैक करके उस पर कब्जा नहीं कर सकी है। ईरान को जीत न सकने वाला बनाने के लिए कई कारणों के साथ-साथ उसकी भौगोलिक स्थिति भी एक बड़ी वजह रही है।

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