सूफी खान
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने की कोशिशें लगातार नाकाम हो रही हैं। तुर्की और कतर की मध्यस्थता के बावजूद तीन दिनों तक चली बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। इस्तांबुल में हुई इन बैठकों में उम्मीद थी कि दोनों देश सीमा विवाद, आतंकी गतिविधियों और सीमा पार हमलों पर कोई साझा हल निकालेंगे, लेकिन स्थिति उल्टी हो गई। परंतु इन सबके बीच ईरान ने बड़ा खेल कर दिया। वो भी ऐसे समय में जब दोनों पाक और तालिबान एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने हों। अफगानिस्तान की प्रमुख एजेंसी खामा प्रेस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच मतभेद इतने गहरे थे कि किसी भी एजेंडे पर सहमति नहीं बन सकी। पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने तालिबान पर यह आरोप लगाया कि काबुल अब स्वतंत्र नीति नहीं चला रहा, बल्कि नई दिल्ली के इशारे पर पैâसले ले रहा है। वहीं अफगानिस्तान का दावा था कि पाकिस्तान अपनी घरेलू असफलताओं का दोष काबुल पर मढ़ रहा है। नतीजा यह निकला कि बातचीत अधूरी रह गई और दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध जैसे हालात बनने लगे। इस बीच तुर्की के बाद कतर ने भी मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन कोई भी दोनों देशों को एक टेबल पर बैठाकर हल नहीं निकाल पाया।
ऐसे माहौल में अचानक ईरान ने बड़ा काम किया है। तेहरान में आयोजित ईसीओ इंटीरियर मिनिस्टर्स मीटिंग के दौरान ईरान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों को एक साथ बैठाने की पहल की। वैâमरे में वैâद हुई तस्वीरों में दोनों देशों के मंत्री मुस्कुराते हुए हाथ मिलाते नजर आए और ये ईरान की कूटनीतिक ताकत को भी दिखाता है। वो भी ऐसे वक्त में जब पश्चिमी देश ईरान को अलग-थलग करने की कोशिशों में लगे हैं। तेहरान का यह कदम क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका को फिर से परिभाषित करता दिखा। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन पहले ही यह प्रस्ताव दे चुके थे कि ईरान इस संघर्ष को सुलझाने में मध्यस्थता की भूमिका निभाने को तैयार है। उन्होंने कहा था कि ‘क्षेत्र में शांति तभी संभव है जब पड़ोसी देश एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि साथ चलने की नीति अपनाएं।’ यह बयान अब ईरान की डिप्लोमेसी की नई दिशा तय करता दिख रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने तेहरान में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से मुलाकात के दौरान तनाव कम करने और टकराव से बचने के प्रयासों पर जोर दिया। ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई की नीति का जिक्र करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किसी भी भूमिका को निभाने के लिए तैयार है। सवाल ये भी उठता है कि क्या तेहरान की यह कोशिश सच में दोनों देशों को युद्ध के मुहाने से वापस खींच पाएगी या फिर ये तस्वीरें भी इतिहास के उन अधूरे समझौतों में शामिल हो जाएंगी, जो कभी अमल में नहीं आ सके।
