मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड: डील करेंगे लेकिन माफ नहीं!

मुस्लिम वर्ल्ड: डील करेंगे लेकिन माफ नहीं!

-ईरान की बेरुखी की वजह क्या?

सूफी खान

ईरान के मिनाब शहर की वो १६८ मासूम बच्चियों की अमेरिकी हमले में मौत और सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की इजरायल के जरिए जान लेना। लगता है कि ईरान कभी नहीं भूलेगा। भले ही अमेरिका के साथ आगे चलकर ईरान के डिप्लोमेटिक रिलेशन कायम हो जाएं,  लेकिन माफी कभी नहीं मिलेगी। ईरान ने इस बात का अहसास करा दिया है।
जब दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली ऐतिहासिक पीस टॉक पर थी। ज्यादातर लोग उम्मीद कर रहे थे कि स्विट्जरलैंड में वैâमरों के सामने दोनों दुश्मनों में गर्मजोशी दिखेगी। लेकिन बैठक शुरू होने से पहले ही कुछ ऐसे वीडियो सामने आए, जिन्होंने पूरा माहौल बदल दिया। ईरान के फॉरेन मिनिस्टर सैयद अब्बास अराघची के नेतृत्व वाले ईरानी डेलिगेशन ने भी सख्त पैगाम देते हुए अमेरिकियों के साथ फोटो खिंचवाने से इनकार कर दिया।
ना सिर्फ ईरान ने फोटो खिंचवाने से इंकार किया, बल्कि वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस से हाथ भी नहीं मिलाया। ईरानी एयरलाइंस मेराज के जिस प्लेन से सैयद अब्बास अराघची और मोहम्मद बाघेर गालिबाफ स्विट्जरलैंड पहुंचे थे, उस पर लिखा था मिनाब १६८। जैसा की पिछली बार इस्लामाबाद में भी देखा गया था। ईरानी प्रतिनिधि मंडल जब भी विदेश जाता है मिनाब की बच्चियों के गुलाबी बैग सीट पर रखकर ले जाता है। ये पैगाम है कि हम अमेरिका और इजरायल के जरिए मासूमों के कत्ल को भूलेंगे नहीं।
इतना ही नहीं, ईरानी पार्लियामेंट के स्पीकर और इस डेलिगेशन के अहम मेंबर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्विट्जरलैंड की उसी जगह से जहां बात होनी थी, मिनाब के स्कूल में जान गंवाने वाली एक बच्ची के परिवार को वीडियो कॉल किया। जिसे ईरानी मीडिया ने खूब चलाया। गालिबाफ ने कहा कि हम अमेरिका से बात करने यहां जरूर आए हैं, लेकिन हमारे शहीदों की यादें हमारे साथ हैं। जब मोहम्मद गालिबाफ बच्ची के पेरेंट्स से बात कर रहे थे तो उनके बगल में मिनाब हमले के विरोध का प्रतीक गुलाबी स्कूल का बैग रखा हुआ था। वहीं विदेश मंंत्री अब्बास अराघची बैठक में लेट भी आए और तुरंत निकल भी गए। शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही इन कूटनीतिक संकेतों और असहज पलों ने बता दिया कि बातचीत की राह आसान नहीं होने वाली है। वहीं बातचीत के दौरान ही ट्रंप की धमकी कि होर्मुज बंद किया तो ईरान को खत्म कर देंगे और ईरानी अधिकारी अपने वतन भी ना लौट पाएंगे। उससे भी इस बातचीत को झटका लगा और ईरानी डेलिगेशन उठ कर चला गया। एक्सपर्ट कहते हैं कि ट्रंप ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि इजरायल को भी उन्हें खुश करना है। दरअसल, वो लेबनान के मामले में इजरायल को समझा नहीं पा रहे हैं, इसलिए ईरान से कह रहे हैं कि ईरान हिजबुल्लाह को समझाए और उसे इजरायल का मुकाबला करने से रोके। ट्रंप की ताजा धमकियों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। हालांकि, कतर और पाकिस्तान इस बातचीत को सफल कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

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