सूफी खान
इराक में अमेरिका सामान समेटने लगा है। पश्चिमी इराक में स्थित सबसे महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डे, ऐन अल-असद को अमेरिका ने खाली कर दिया है। शनिवार, १७ जनवरी को अमेरिकी सेना ने इस बेस को खाली कर दिया और इसकी चाबियां इराकी सेना को सौंप दीं। इराकी रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि अब इस विशाल सैन्य ठिकाने का नियंत्रण और प्रबंधन पूरी तरह से इराकी सुरक्षा बलों के हाथों में है। कहा जा रहा है कि अमेरिका ने इस बेस की संवेदनशील तकनीक और कुछ विशिष्ट सैन्य टुकड़ियों को कुवैत और जॉर्डन के ठिकानों पर ट्रांसफर कर दिया है। एक्सपर्ट कहते हैं हालांकि, ये वापसी पहले से तय थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में ईरान में जारी व्यापक सरकार विरोधी प्रदर्शनों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। ईरान पहले ही कह चुका है कि अगर अमेरिका ने उस पर किसी भी तरह का हमला किया तो वो मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी एयरबेस तबाह कर देगा। ऐन अल-असद ईरान की मिसाइल रेंज के सबसे करीब था। जानकार मानते हैं कि अमेरिका ने अपने सैनिकों को संभावित ईरानी जवाबी हमले की चपेट से बचाने के लिए और भविष्य में किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए `स्पेस’ बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। इस आधार पर देखें तो ईरान और अमेरिका के बीच जंग का खतरा अभी टला नहीं है। क्या ईरान से लगे इराकी एयरबेस खाली करना उसी अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है, ये बड़ा सवाल है। अमेरिकी फौज के जाने के बाद इराक के भीतर सक्रिय विभिन्न सशस्त्र समूहों के प्रभाव को कम करना वहां की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। कहा जा रहा है कि इराक से अमेरिका की यह विदाई न केवल मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को बदलेगी, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी अब खुद इराक और उसके पड़ोसियों पर डाल देगी। वैसे भी इराक में ईरान का बड़ा दखल माना जाता है। सरकार इस बेस का इस्तेमाल अपनी मजबूती के लिए वैâसे करती है। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेश्कियान ने अमेरिका को सीधी धमकी दी है। उन्होने कहा है कि अगर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को कुछ भी हुआ तो ये ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध माना जाएगा।
