मुख्यपृष्ठस्तंभअपना भी हाल कुछ तेरे जैसा है...!

अपना भी हाल कुछ तेरे जैसा है…!

-महंगाई की मार से अमेरिकी भी परेशान
-हुक्मरानों ने किया जीना हराम
-रोटी कपड़ा और मकान के दाम आसमान पर

-मनमोहन सिंह

अमेरिका में इस समय कुछ वैसे ही राजनीतिक और आर्थिक हालात देखने को मिल रहे हैं, जैसे अक्सर हिंदुस्थान में आम चुनावों या उपचुनावों के वक्त महंगाई और बेरोजगारी को लेकर देखने को मिलते हैं। अमेरिका में नजदीक आ रहे मिडटर्म चुनावों से पहले कुछ ऐसा ही माहौल बना हुआ है, जहां आम जनता की सबसे बड़ी चिंता बढ़ती महंगाई और बिगड़ती आर्थिक स्थिति है।
महंगाई की मार और आम जनता का गुस्सा
हिंदुस्तान की तरह ही अमेरिकी मिडिल क्लास भी इस समय कड़े आर्थिक दौर से गुजर रहा है। अमेरिका में गैस र्इंधन, किराना, और रोजमर्रा के अनाज-भोजन की कीमतें आसमान छू रही हैं। आम नागरिकों के लिए घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च उठाना मुश्किल होता जा रहा है।
इस मंहगाई ने अमेरिकी मध्य वर्ग की कमर तोड़ दी है। नतीजतन, सत्ताधारी पार्टी और विशेष तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के खिलाफ मतदाताओं में भारी असंतोष, गुस्सा और नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। लोगों का मानना है कि सरकार की नीतियां आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं।
राजनीतिक संकट और मिडटर्म चुनाव
जैसे हिंदुस्थान में किसी भी सरकार के लिए महंगाई चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बनती है, वैसे ही अमेरिका में भी मिडटर्म चुनाव सिर पर हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के रिपब्लिकन नेताओं को मतदाताओं की इस aतीखी नाराजगी का सीधे तौर पर सामना करना पड़ रहा है। सांसदों और नेताओं को अपने ही इलाकों में जनता के तीखे सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है। रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के दौरान लोग गैस और खाने-पीने की चीजों के बढ़े दामों को लेकर सीधा विरोध दर्ज करा रहे हैं। रिपब्लिकन रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि मतदाता महंगाई के इस गुस्से को मतपेटी में उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
लुब-ए-लुआब ये कि अटलांटिक के इस पार हिंदुस्थान हो या उस पार अमेरिका, आम आदमी की सबसे बड़ी भाषा ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ यानी महंगाई और अर्थव्यवस्था ही है। जब रसोई और जेब पर संकट आता है, तो सत्ता किसी भी दल की हो, जनता का गुस्सा हर जगह एक जैसा ही फूटता है।

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