मुख्यपृष्ठस्तंभनहीं हुई नेताजी की दुर्घटना में मृत्यु कहना है उनके नाती का

नहीं हुई नेताजी की दुर्घटना में मृत्यु कहना है उनके नाती का

विमल मिश्र

टोक्यो के रेंकोजी मंदिर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस के समाधि स्थल का दर्शन करते समय सपने में भी नहीं सोचा था कि कुछ ही समय बाद मुंबई में उनकी यादों से प्रत्यक्ष वास्ता पड़ेगा उन्हीं के एक निकट संबंधी से मुलाकात के रूप में। आजाद हिंद फौज के ८३वें स्थापना दिवस पर बुधवार शाम पवई के आईआईटी मा़र्वेâट स्थित हनुमान रोड पर विनोद चतुर्वेदी (विनोदानंद जयहिंदवाले) द्वारा कायम ‘नेताजी परिचय केंद्र’ का उद्घाटन करने नेताजी के पड़नाती इंद्रनील मित्रा पधारे थे। इंद्रनील को जब अपनी पुस्तक ‘महाराष्ट्र – बलिदानों की धरती’ से नेताजी की मुंबई यात्राओं और यहां महात्मा गांधी से उनकी भेंट संबंधी उनके वृत्तांत पढ़कर सुना रहा था कि सहसा उन्होंने पूछ डाला, ‘क्या आपको जापानी सैन्य विमान से मंचूरिया जाते समय नेताजी की ताइपेई (ताइवान) में विमान दुर्घटना से हुई मौत की कहानी पर यकीन है?’
नेताजी सुभाषचंद्र बोस का निधन भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और अनसुलझे रहस्यों में से एक है। दुर्घटना के समय का कोई प्रामाणिक फोटो या वीडियो उपलब्ध नहीं था। यही नहीं, अस्पताल के रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र और नेताजी के अंतिम संस्कार से जुड़े दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां पाई गईं थीं। जहां नेताजी की बेटी अनिता बोस फाफ और भतीजे सुगत बोस का मानना था कि नेताजी की मृत्यु इस दुर्घटना में ही हुई थी, वहीं इंद्रनील मित्रा, नेताजी के पड़पोते चंद्र कुमार बोस, अन्य रिश्तेदार जयंती रक्षित और उनके परिवार के अन्य सदस्य इससे सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि जब तक नेताजी की मृत्यु और उसके स्थान को लेकर कोई ठोस, निर्णायक और वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आता, तब तक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु की थ्योरी को सच नहीं माना जा सकता। इसी तर्क पर वे १८ अगस्त को नेताजी की पुण्यतिथि मनाए जाने का भी विरोध करते हैं। इंद्रनील ने इस भेंट में भी नेताजी के लापता होने से जुड़े सभी ऐतिहासिक अभिलेखों व फाइलों को पूरी तरह सार्वजनिक करने की अपनी पुरानी मांग दोहराई।
नेताजी के परिजन अपने इस तर्क के संबंध में सार्वजनिक मंचों पर सरकार द्वारा नामंजूर जस्टिस मुखर्जी कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हैं (इससे पहले बने दो सरकारी जांच आयोगों ने दुर्घटना होने की पुष्टि की थी।), जिसने निष्कर्ष निकाला था कि नेताजी की मृत्यु ताइवान के कथित विमान हादसे में नहीं हुई थी। इंद्रनील और उनके अन्य परिजनों ने अगस्त, २०२३ में कोलकाता प्रेस क्लब से एक ऑनलाइन सिग्नेचर कैपेन ‘१९४५ के बाद नेताजी कहां थे?’ की शुरुआत की है, ताकि उनके लापता होने के सच को सामने लाया जा सके। ‘यूनाइटेड प्लेटफॉर्म फॉर नेताजी’ नामक संगठन के माध्यम से वे नेताजी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और बोस परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए देशभर में जागरूकता कार्यक्रम और गोष्ठियां आयोजित किया करते हैं, ताकि आजाद हिंद फौज के वास्तविक इतिहास को पाठ्यपुस्तकों और जनमानस में सही स्थान मिल सके।
शैलेशचंद्र बोस जो नेताजी के सगे छोटे भाई थे – स्वतंत्रता के बाद से मुंबई के वर्ली में ही परिवार के साथ रहने लगे थे। २०१५ में खुफिया फाइलों से यह खुलासा हुआ था कि आजादी के बाद तत्कालीन केंद्र सरकार द्वारा कोलकाता के साथ-साथ मुंबई में शैलेशचंद्र बोस के घर की भी जासूसी की जा रही थी और उनके फोन टेप किए जा रहे थे। शैलेशचंद्र बोस के बेटे और नेताजी के कारोबारी भतीजे अर्धेंदु बोस का जन्म भी मुंबई में ही हुआ था। अर्धेंदु को ‘बॉम्बे डाइंग’ के लिए मॉडलिंग के लिए अधिक जाना जाता है।
(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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