खुशबू सिंह
-महिलाओं के लिए न्याय की मिसाल बना मुंबई हाई कोर्ट!
शहर की चकाचौंध भरी सड़कों पर जहां हर कोई अपनी फिटनेस के लिए जॉगिंग करता नजर आता है, वहीं महिलाओं की सुरक्षा का सवाल फिर से सुर्खियों में है। मुंबई के बोरीवली कोर्ट ने एक सनसनीखेज मामले में न्याय की मिसाल कायम की। दरअसल, ३० साल के आरोपी नरेश कोल को जॉगिंग कर रही महिला के साथ छेड़छाड़ और उसे जंगल में खींचने की कोशिश के लिए एक साल की जेल की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने साफ कहा, ‘गलत काम को शुरुआत में ही रोकना जरूरी है, नरमी बर्दाश्त नहीं!’ ये पैâसला न सिर्फ पीड़िता को राहत देता है, बल्कि समाज को चेतावनी भी कि महिलाओं की मर्यादा से खिलवाड़ महंगा पड़ेगा। आइए जानते हैं कि इस मामले की पूरी इनसाइड स्टोरी, जो मुंबई की महिलाओं के लिए सबक और उम्मीद दोनों है।
क्या है पूरा मामला?
घटना २१ मार्च की शाम की है। मुंबई के पश्चिमी बोरीवली इलाके में एक महिला रात ८ बजे जॉगिंग कर रही थी। फिटनेस रूटीन में डूबी ये महिला अचानक सदमे में आ गई जब पीछे से एक अनजान शख्स ने उसे पकड़ लिया। आरोपी नरेश कोल ने उसके साथ अभद्रता की और उसे पास के जंगल में खींचने की कोशिश की। महिला की चीखें सुनकर वहां से गुजर रहा एक बाइक सवार व्यक्ति रुका। उसने हिम्मत दिखाई, आरोपी को दबोचा और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज की और नरेश को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि आरोपी की मंशा साफ तौर पर गलत थी, महिला की गरिमा भंग करना और उसकी सुरक्षा को खतरे में डालना।
कोर्ट ने दिखाई सख्ती
ट्रायल के दौरान कोर्ट रूम में ड्रामा देखने को मिला। पीड़िता महिला और बाइक सवार गवाह बने। उनके बयानों पर कोर्ट ने पूरा भरोसा जताया। आरोपी ने बचाव में अजीब दावा किया, ‘मैं तेज रफ्तार गाड़ी से बच रहा था, सड़क पार करने की कोशिश में टकरा गया।’ लेकिन बोरीवली कोर्ट ने २२ अगस्त को पैâसला सुनाते हुए इसे खारिज कर दिया। जज ने तर्क दिया, ‘अगर दुर्घटना होती तो महिला क्यों चिल्लाती? जंगल में खींचने की क्या जरूरत थी?’ कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोपी के इरादे दुर्भावनापूर्ण थे, जो महिला की सुरक्षा को खतरे में डालते हैं। दोनों गवाह अजनबी थे, उनके पास झूठ बोलने का कोई मकसद नहीं। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा ७४ के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई, जिसमें गिरफ्तारी के बाद के ५ महीने भी शामिल हैं। ये केस मुंबई जैसे महानगर में महिलाओं की बढ़ती असुरक्षा को उजागर करता है। आंकड़ों से पता चलता है कि एनसीआरबी रिपोर्ट २०२३ के मुताबिक, मुंबई में छेड़छाड़ के मामले १५ प्रतिशत बढ़े हैं, खासकर शाम के समय पार्क्स और सड़कों पर। विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे अपराधों में सख्त सजा ही रोकथाम का तरीका है। कोर्ट का ये कदम प्रेरणादायक है। युवा आरोपी होने के बावजूद कोई रियायत नहीं। महिलाओं के लिए टिप-जॉगिंग के दौरान ग्रुप में जाएं, इमरजेंसी ऐप्स यूज करें। पुलिस अब सीसीटीवी और पेट्रोलिंग बढ़ा रही है। कोर्ट का ये पैâसला बताता है कि न्याय व्यवस्था जाग रही है, लेकिन समाज को भी बदलना होगा। बेटियों को सुरक्षित माहौल दें, अपराधियों को सबक सिखाएं।
