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न्यूज स्कैन : जब बेटे की सनक ने तोड़ा ममता का बंधन… मां को बताया ‘चरित्रहीन’

खुशबू सिंह

इसी साल अगस्त महीने की बात है, जब दिल्ली के दिल में एक ऐसी घटना ने जन्म लिया, जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया। एक बेटे, जिसे मां की गोद में प्यार और संस्कार मिलने चाहिए थे, वो अपनी ही ६२ साल की बुजुर्ग मां का दरिंदा बन गया। उसने न सिर्फ मां को ‘चरित्रहीन’ का तमगा दिया, बल्कि कई बार उसके साथ बलात्कार जैसी घिनौनी हरकत की। ये कहानी सुनकर पुलिस वाले भी सन्न रह गए। लेकिन एक बेटी की हिम्मत और मां की पीड़ा ने इस अंधेरे में इंसाफ की एक किरण जलाई।
हौज काजी की गलियों में मां की चीखें
मध्य दिल्ली के हौज काजी इलाके की तंग गलियां, जहां लोग रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहते हैं, वहां एक मां की कराहें गूंज रही थीं। ६२ साल की ये बुजुर्ग महिला, जिसने अपने बेटे को जन्म दिया, पाला-पोसा, आज उसी के हाथों अपमान और दर्द की सजा भुगत रही थी। इसी महीने कई बार उस बेटे ने अपनी मां के साथ मारपीट की और यौन शोषण जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दिया। ये सब तब हुआ, जब वो अपने पति और बेटी के साथ सऊदी अरब की तीर्थयात्रा से लौटी थी। लेकिन इस मां की हिम्मत टूटी नहीं। अपनी २५ साल की बेटी का हाथ थामकर वो हौज काजी थाने पहुंची और अपनी आपबीती सुनाई।
‘मम्मी चरित्रहीन है, तलाक दे दो!’ 
पुलिस की फाइलों में दर्ज इस मामले की कहानी रोंगटे खड़े कर देती है। महिला ने बताया कि वो २५ जुलाई को अपने ७२ साल के पति और बेटी के साथ सऊदी अरब की तीर्थयात्रा पर गई थी। इस पवित्र यात्रा के दौरान ही उनके बेटे ने अपने पिता को फोन किया। उसकी आवाज में गुस्सा था, नफरत थी। उसने मां पर ‘चरित्रहीन’ होने का घिनौना आरोप लगाया और चिल्लाकर कहा, ‘पापा, तुरंत दिल्ली लौटो और मम्मी को तलाक दे दो!’ ये सुनकर बुजुर्ग दंपति और उनकी बेटी के पैरों तले जमीन खिसक गई। क्या कोई बेटा अपनी मां के लिए इतना जहरीला सोच सकता है?
मां की पीड़ा, बेटी की हिम्मत
इस बर्बरता का शिकार हुई मां ने हार नहीं मानी। अपने दर्द को छुपाने के बजाय, वो अपनी बेटी के साथ थाने पहुंची। उसकी आवाज में दुख था, आंखों में आंसू थे, लेकिन इंसाफ की आस थी। बेटी ने अपनी मां का साथ दिया, उसका हौसला बढ़ाया। थाने में मौजूद पुलिसकर्मी भी ये सुनकर स्तब्ध रह गए। एक मां, जिसने अपने बेटे को जिंदगी दी, आज उसी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने को मजबूर थी। लेकिन इस मां और बेटी की हिम्मत ने साबित कर दिया कि सच्चाई और इंसाफ के लिए कोई भी दर्द छोटा नहीं होता।
इंसाफ की ओर पहला कदम
हौज काजी पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस की इस तत्परता ने पीड़ित परिवार को थोड़ी राहत दी, लेकिन सवाल यह है कि क्या इंसाफ इस मां के जख्मों को भर पाएगा?
ये घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि हमारे समाज का आईना है। एक बेटा, जो मां की गोद में पला, कैसे उसका शिकारी बन गया? क्या रिश्तों की पवित्रता अब सिर्फ किताबों में रह गई है? क्या हमारी नई पीढ़ी में नैतिकता और सम्मान की कमी हो रही है? ये मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं। एक मां, जो अपने बेटे के लिए सब कुछ त्याग देती है, क्या उसे ऐसी सजा मिलनी चाहिए? ये कहानी हर उस इंसान को झकझोरती है, जो रिश्तों की कीमत समझता है।

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