सामना संवाददाता / सुल्तानपुर
यूपी के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री का अजब हाल है। अभी चंद रोज पहले पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की जगह उत्तर प्रदेश शासन ने उन्हें सुल्तानपुर जिले का भी प्रभारी मंत्री बना दिया है। शनिवार को वे पहली बार आधिकारिक तौर पर सुल्तानपुर के दौरे पर पहुंचे। पहले तो स्थानीय अफसरों से कानून व्यवस्था की समीक्षा के बहाने भेंट मुलाकात की। इसके बाद वे मीडिया संवाद कार्यक्रम में पत्रकारों से मिलने पहुंचे वह भी सिर्फ पीएम मोदी के कसीदे पढ़ने। लिखित में संगठन की ओर से प्रदत्त पीएम मोदी की तारीफ के बिंदुओं पर ही वे एकतरफा संवाद करते नजर आए। अपने मंत्रालय खेल एवं युवा कल्याण व सुल्तानपुर जिले के विकास से संबंधित न कोई एजेंडा बताया न ही इससे संबंधित योजनाओं का ही जिक्र किया। पीएम मोदी के लगातार बारह वर्षों के शासन की उपलब्धियां गिनाकर वे चलते बने। हालांकि, एक गांव में जन चौपाल जरूर की। अधिकारियों ने इस आयोजन की पूर्व नियोजित तैयारी कर रखी थी। बता दें कि सुल्तानपुर भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की बसाई कुश नगरी है। खिलजी ने यहां के पराक्रमी हिन्दू शासक राजा नंद कुंवर को परास्त करके इस नगरी का नाम सुल्तानपुर कर दिया था। इसे पुनः प्राचीन नाम ‘कुशभवनपुर’ प्रदान करने के लिये लंबे समय से जन आंदोलन चल रहा है। स्थानीय नगर पालिका ने दस वर्ष पूर्व ही नगर व जिले का नाम पुनः कुशभवनपुर करने का प्रस्ताव भी पास करके शासन को भेज दिया है। कई विधायक भी सीएम योगी से इस बाबत प्रभावी कदम उठाने की बात कर चुके हैं। बावजूद अन्य अनेकों जिलों व कस्बों के गुलामी के प्रतीक नाम परिवर्तित हो गए, लेकिन सुल्तानपुर अभी भी वहीं का वहीं है। जिला उद्योग विहीन है और पर्याप्त जन संसाधनों की अभी भी कमी है, लेकिन इसकी चिंता न पूर्व प्रभारी ओम प्रकाश राजभर ने की न ही नवनियुक्त प्रभारी मंत्री गिरीश यादव से ही उम्मीद दिख रही है।
