गुटबाजी के चलते कभी भी छिड़ सकती है ‘जंग’
प्रेम यादव / मुंबई
मुंबई की चमकती रातों के पीछे फिर अंधेरे का कारोबार पल रहा है। डांस बारों की काली कमाई पर कब्जे की लड़ाई ने शहर में गुटबाजी का नया दौर शुरू कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि इस गुटबाजी ने अब मुंबई पुलिस के भीतर तक सेंध लगा दी है, जहां कुछ भ्रष्ट अधिकारी खुद इस बार सिंडिकेट का हिस्सा बन चुके हैं।
मुंबई के बार कारोबार में अब दो गुट खुले तौर पर आमने-सामने हैं। जानकार बतातें हैं कि यह स्थिति कभी भी गंभीर रूप ले सकती है, क्योंकि जब ‘सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का’ जब इन गुटों को पुलिस का ही पूर्ण रूप से सहयोग मिल रहा है तो यह स्थिति भयानक है, जो ९० के दशक के गैगवॉर वाले दौर की आहट है। कानून की रखवाली करनेवाले ही अगर सौदे करने लगें तो शहर को कौन बचाएगा?
एक ओर पुराना और मजबूत बार लॉबी का शेट्टी ग्रुप तो दूसरी तरफ तेजी से उभरता मराठी लॉबी सिंडिकेट। दोनों ही पक्ष अरबों की कमाई वाले बार कारोबार पर वर्चस्व चाहते हैं। मामला तब खुलकर सामने आया जब दहिसर के आशीष बार पर मुंबई पुलिस की प्रॉपर्टी सेल ने रेड मारी, लेकिन सूत्रों के अनुसार, यह कोई नियमित कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक गुट ने दूसरे पर रेड करवाने के लिए पुलिस को सुपारी दी थी। यानी अब कार्रवाई भी वैâश के दम पर तय हो रही है।
जारी हैं बार वालों से करोड़ों की वसूली
अंधेरी से दहिसर तक शेट्टी गुट का नेटवर्क पैâला हुआ है। इस गुट के प्रमुख सुदेश शेट्टी और गिरीश शेट्टी बताए जाते हैं, जो अंधेरी में उर्वशी, दासी, मानसी, गोरेगांव में सोना बार और बोरीवली में चार्वाक, वहीं दहिसर में कव्वाली और रेड हॉर्स जैसे कई बड़े डांस बारों का संचालन करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन बारों से हर महीने ४० से ५० लाख रुपए की अवैध वसूली की जाती है। यह रकम सेटिंग के जरिए कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाई जाती है, जिसके बाद इन बारों पर न तो लोकल पुलिस कार्रवाई करती है और न ही क्राइम ब्रांच की कोई यूनिट हाथ डालती है। यानी जहां रिश्वत का पहिया घूमता है, वहां कानून की आंखें अपने आप बंद हो जाती हैं।
मराठी बार लॉबी की एंट्री से टकराव शुरू
उपनगरों में मराठी भाषी बार चालकों का नया सिंडिकेट तेजी से पैर जमा चुका है। इस गुट में मितेश जाधव और सचिन दांडगे प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि दहिसर स्थित आशीष बार इसी ग्रुप का है, जहां शेट्टी गिरोह ने क्राइम ब्रांच के कुछ अफसरों की मदद से रेड करवाया। इस कार्रवाई ने बार माफिया की पूरी पोल खोल दी कि अब बार की लड़ाई सड़क पर नहीं, बल्कि पुलिस दफ्तरों में लड़ी जा रही है। शेट्टी लॉबी, किसी अन्य को इस व्यवसाय में पनपने नहीं देना चाहती और इनकी खबरियों की मदद से पुलिस के जरिए रेड करवाकर कंपटीशन खत्म करने की रणनीति है।
परमबीर सिंह पैटर्न की वापसी?
सूत्रों का कहना है कि मुंबई पुलिस में अब फिर से वही पुराना परमबीर सिंह पैटर्न लौट आया है, जहां रिश्वत, खबरी और सेटिंग के सहारे पूरी कार्रवाई तय की जाती है। मौजूदा पुलिस कमिश्नर देवेंद्र भारती के कार्यकाल में शुरुआत में डांस बार, हुक्का पार्लर और अवैध कसीनो पर कड़ी कार्रवाई की गई थी, लेकिन अब उन्हीं के दौर में फिर कुछ भ्रष्ट अधिकारी इस सिंडिकेट के साथ मिलकर धन उगाही में मशगूल हैं। गोरेगांव से दहिसर तक करीब ३५ डांस बार और हुक्का पार्लर पर शेट्टी गिरोह का कब्जा है। हर महीने ४०-५० लाख की वसूली होती है और पुलिस तक हिस्सा पहुंच जाता है। बार संचालकों और अफसरों के बीच गुप्त रेड सौदेबाजी भी तय है।
पुलिस विभाग में भी दो खेमे
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुंबई पुलिस के भीतर भी अब दो गुट बन चुके हैं। एक गुट शेट्टी लॉबी से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि दूसरा मराठी बार संचालकों के करीब है। सूत्रों के अनुसार, अब रेड और कार्रवाई पैसे और प्रभाव के आधार पर तय की जाती है। अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी किसी बार से वसूली लेकर दूसरे बार पर छापा मार देते हैं। यह सिस्टम अब खुलेआम चल रहा है और इसकी गूंज पुलिस मुख्यालय तक पहुंच चुकी है।
