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ए सरकार…सब्जी पर छाई महंगाई, पेट कइसे भराई! …कीमतों में १०-२० प्रतिशत की बढ़ोतरी

आम नागरिकों ने सरकार से लगाई गुहार

द्रुप्ति झा / मुंबई
लोग अब सब्जियों को खरीदने के लिए अधिक पैसे खर्च करने को मजबूर हैं। नई मुंबई की एपीएमसी बाजार में जुलाई के महीने में एक बार फिर सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मई महीने में सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हुई थी, जो अभी तक जारी है। अप्रैल की तुलना में अब सब्जियों की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। वहीं जून के मुकाबले जुलाई में सब्जियों की कीमतें १० से २० प्रतिशत बढ़ गई हैं। अब नागरिकों का कहना है कि ए सरकार सब्जी पर महंगाई छाई है तो पेट कैसे भरेगा।


सब्जी बाजार के संचालक शंकर पिंगले ने बताया कि हर साल जून के महीने में जब बरसात शुरू होती थी तो सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी होती थी और वह जून के अंत तक रहती थी और जुलाई के महीने से कीमतें कम होना शुरू हो जाती थीं। इस साल मई के अंत में हुई बरसात का सब्जियों के उत्पादन पर विपरीत असर पड़ा है। इसके चलते मई में कीमतें बढ़नी शुरू हुई थी वह अब और अधिक बढ़ गई हैं।
रोज घरों में बनने वाली लगभग सभी सब्जियां महंगी चल रही हैं। ज्यादातर सब्जियां होलसेल बाजार में ६० रूपए किलों के ऊपर ही बिक रही हैं और रिटेल बाजार में वही सब्जियां सौ रुपए के ऊपर बिक रही हैं। बाजार में रोजाना माल की आवक के साथ कीमतों पर असर पड़ता है। जिस तरह से बाजार में माल की आवक हो रही है और हमें किसानों से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे लगता है कि इस पूरे महीने सब्जियों की कीमतें अधिक ही रहेंगी। किसी एक दिन १० प्रतिशत कम तो दूसरे दिन ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन ज्यादा गिरावट आने की संभावना नहीं है। अगस्त महीने के मध्य में जब नई फसलें आनी शुरू होंगी, तब सब्जियों की कीमतें कम हो सकती हैं।
सब्जियों की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं। जो सब्जी मैं सामान्य तौर पर आधा किलो लेकर जाती थी, वह अब पाव किलो ही लेकर जा रही हूं। सरकार को सब्जियों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
-राकेश जयसवाल, ग्राहक

हम मिडिल क्लास वालों के घरों का बजट फिक्स होता है, सब्जियों के दाम बढ़ने से पूरा बजट बिगड़ जाता है और अब तो हर चीज की मंहगाई बढ़ गई है। सरकार को हम मिडिल क्लाक के लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए।
-सीमा शर्मा, ग्राहक

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