-अंजलि दमानिया ने दागे ६ सवाल…राजनीतिक गलियारों में उठा तूफान
सुनील ओसवाल / मुंबई
पवनराजे निंबालकर हत्याकांड के पैâसले के बाद सांसद ओमराजे निंबालकर के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर रविवार को विराम लग गया। धाराशिव के गोवर्धनवाड़ी में कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए उन्होंने उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने का एलान कर दिया, लेकिन ‘फादर्स डे’ के दिन लिए गए इस पैâसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर छह तीखे सवाल दागते हुए पूछा है कि क्या ओमराजे न्याय की लड़ाई छोड़कर सत्ता और मंत्री पद के लिए शरणागति स्वीकार कर रहे हैं?
दमानिया ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘आज फादर्स डे है और इसी दिन ओमराजे निंबालकर ने महायुति सरकार में शामिल होने का फैसला किया। क्या यह महज संयोग है?’ इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक छह सवाल उठाए। पहला सवाल- जिस व्यक्ति पर उनके पिता पवनराजे निंबालकर की हत्या का आरोप था, उसके बेटे राणा जगजीतसिंह पाटील आज महायुति में भाजपा विधायक हैं। ऐसे गठबंधन का हिस्सा बनने का पैâसला आखिर वैâसे लिया जा सकता है? दूसरा सवाल- उसी आरोपी की सगी बहन सुनेत्रा पवार आज इसी सत्ता गठबंधन में उप मुख्यमंत्री पद पर हैं। ऐसे में उसी सत्ता के साथ जाने का पैâसला क्या संदेश देता है? तीसरा सवाल- क्या ओमराजे को सचमुच विश्वास है कि यही सरकार उनके पिता के हत्यारों को सजा दिलाएगी? क्या इस व्यवस्था से उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है? चौथा सवाल-क्या इस सरकार में इतनी राजनीतिक इच्छाशक्ति है कि वह सुनेत्रा पवार के सगे भाई पद्मसिंह पाटील के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें सजा दिलाने का साहस दिखा सके? पांचवां सवाल- क्या भाजपा के ही एक विधायक के पिता के खिलाफ सरकार वास्तव में निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी? छठा तथा सबसे बड़ा सवाल- क्या अपने पिता के लिए न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने के बजाय ओमराजे निंबालकर मंत्री पद की संभावनाओं के लिए शरणागति स्वीकार कर रहे हैं?
सत्ता, न्याय और नैतिकता पर छिड़ी नई बहस
अंजलि दमानिया के इन सवालों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। फादर्स डे के दिन लिए गए इस राजनीतिक पैâसले और उस पर उठे सवालों ने सत्ता, न्याय और राजनीतिक नैतिकता को लेकर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है। अब निगाहें ओमराजे निंबालकर और महायुति नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
