अनिल मिश्र / पटना
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ अर्थ, बायोलॉजिकल एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज (एसईबीईएस) द्वारा माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसाइटी, इंडिया के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस–2026 मनाया गया। सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने सूक्ष्मजीवों के लाभ एवं हानियों पर विस्तार से विस्तृत चर्चा की जिसमें रोगजनकों के हानिकारक प्रभावों के साथ-साथ लैक्टोबैसिलस, यीस्ट आदि लाभकारी जीवाणुओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। औपचारिक उद्घाटन के पश्चात एसईबीईएस के अधिष्ठाता प्रो. रिजवानुल हक ने अतिथियों एवं सभागार में मौजूद प्राध्यापकों, कर्मियों एवं छात्रों का स्वागत करते हुए मानव जीवन में सूक्ष्मजीवों के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए सहयोगात्मक अनुसंधान की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस प्रत्येक वर्ष हमारे दैनिक जीवन, स्वास्थ्य, भोजन एवं पर्यावरण में सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानने और उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ अनुसंधान वैज्ञानिक एवं आबिर बायो-सर्विसेज फाउंडेशन के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मोहम्मद कौसर नियाज ने मानव पेपिलोमा विषाणु (एचपीवी) तथा गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर की रोगजनन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह विषाणु पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है तथा कम उम्र से लेकर 60 वर्ष के बाद तक जीवन के विभिन्न चरणों में टीकाकरण एवं नियमित स्वास्थ्य जांच के माध्यम से इसके संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।विशिष्ट अतिथि के रूप में जामिया हमदर्द, नई दिल्ली के अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. सुहेल परवेज ने श्रोताओं को सूक्ष्मजीवों की रोचक दुनिया से परिचित कराया। उन्होंने सूक्ष्मजीवों से जुड़े कई रोचक तथ्य साझा करते हुए कहा कि यदि सूक्ष्मजीव न होते तो हम दही, जलेबी और पिज्जा जैसे खाद्य पदार्थों का आनंद नहीं ले पाते। उन्होंने बताया कि एक प्रतिशत से भी कम सूक्ष्मजीव रोग उत्पन्न करते हैं, जबकि शेष या तो हानिरहित हैं या हमारे तथा पर्यावरण के लिए लाभकारी हैं।मुख्य अतिथि मगध विश्वविद्यालय, बोधगया के कुलपति एवं प्राणीशास्त्र के विशेषज्ञ प्रो. दिलीप कुमार केसरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए पौधों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सूक्ष्मजीवों की महत्वपूर्ण भूमिका समझाई। उन्होंने कहा कि चूंकि हम पौधों पर निर्भर हैं, इसलिए सूक्ष्मजीवों के बिना हमारा अस्तित्व संभव नहीं है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता के साथ अंतरराष्ट्रीय सूक्ष्मजीव दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के लिए आयोजन दल की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी केवल संसाधन नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र निर्माता हैं। प्रत्येक विद्यार्थी विशिष्ट है और उसमें अपार संभावनाएं हैं। प्रो. सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मानव प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन कर रहा है तथा पृथ्वी की विभिन्न परतों सहित पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है।
कार्यक्रम के आयोजन सचिवों में डॉ. जावेद अहसन (बायोटेक्नोलॉजी), डॉ. अमृता श्रीवास्तव (लाइफ साइंस), डॉ. सुनीता सिंह (जियोग्राफी), डॉ. धीरेन्द्र कुमार (जियोलॉजी), डॉ. कृष्ण कुमार ओझा (बायोटेक्नोलॉजी) तथा डॉ. प्रशांत (एनवायर्नमेंटल साइंस) ने अहम भूमिका निभाई । कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनीता सिंह ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों सहित 300 से अधिक लोगों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता से हुआ। विद्यार्थियों ने सूक्ष्मजीवों पर आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक मॉडल बनाकर अपनी रचनात्मकता, कल्पनाशीलता एवं प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में विद्यार्थी दलों को तीन पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शोधार्थियों द्वारा लघु मौखिक प्रस्तुतियां भी दी गईं तथा प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उत्कृष्ट शोध प्रकाशनों के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
