मुख्यपृष्ठनए समाचार‘लिफाफा’ लेकर तृणमूल तोड़ी, तो बागियों को चुनाव चिह्न भी मिला ‘लिफाफा’!

‘लिफाफा’ लेकर तृणमूल तोड़ी, तो बागियों को चुनाव चिह्न भी मिला ‘लिफाफा’!

-जनता का तंज—‘पहली बार चुनाव आयोग ने बेईमानी का काम ‘ईमानदारी से किया’!’

सामना संवाददाता / कोलकाता

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह के बंटवारे के बाद सियासी बयानबाजी और सोशल मीडिया पर तंज का दौर तेज हो गया है। चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया है, जबकि बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया है।
चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जमकर चुटकी ली जा रही है। लोगों के बीच इस बात को लेकर व्यंग्य किया जा रहा है कि जिन बागी नेताओं पर कथित तौर पर ‘लिफाफे’ के जरिए लेन-देन और सौदेबाजी के आरोप लगाए जा रहे थे, उन्हें चुनाव चिन्ह भी ‘लिफाफा’ ही मिल गया। हालांकि, ये राजनीतिक तंज और आरोप हैं, इन्हें चुनाव आयोग के फैसले से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
बागी गुट की पहली पसंद ही था ‘लिफाफा’
दूसरी ओर, बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव चिन्ह को लेकर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनका गुट सामूहिक रूप से फैसले लेता है। उनके मुताबिक, गुट ने चुनाव आयोग को तीन विकल्प दिए थे और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह उनकी पहली पसंद था। उनका कहना है कि लिफाफा आम जनता तक अपनी बात पहुंचाने का एक प्रतीक है।
दोनों गुटों को अस्थाई नाम और चुनाव चिह्न आवंटित
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अस्थायी नाम और चुनाव चिन्ह आगामी उपचुनावों के लिए आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ और बागी गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है। मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को फिलहाल स्थगित रखा गया है।
ममता गुट के हिस्से में आया ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह अब उसके चुनाव प्रचार का नया प्रतीक होगा। वहीं बागी गुट के पास ‘लिफाफा’ है। चुनावी मैदान में दोनों नए नाम और चिन्ह कितने प्रभावी साबित होते हैं, यह आने वाले उपचुनाव में स्पष्ट होगा। फिलहाल बंगाल की राजनीति में ‘फुटबॉल’ और ‘लिफाफा’ की यह नई सियासी जोड़ी चर्चा का विषय बन गई है। खासकर ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह को लेकर सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य का दौर तेज है।
ममता गुट: ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह के जरिए बंगाल के सबसे लोकप्रिय खेल से जुड़कर आक्रामक चुनाव प्रचार और राजनीतिक ‘गोल’ करने का दांव खेलेगा।
ऋतब्रत गुट: ‘लिफाफे’ को अपनी पहली पसंद बताकर भले ही इसे आम जनता से जुड़ने का प्रतीक बता रहा हो, लेकिन विपक्षी दल और सोशल मीडिया पर कई लोग इसे ‘लेन-देन’ और सियासी बगावत के प्रतीक के तौर पर प्रचारित कर रहे हैं।

अन्य समाचार