सामना संवाददाता / नई दिल्ली
मीरा-भायंदर के भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता अब अकेले नहीं, बल्कि पूरी महायुति सरकार के गले की फांस बन गए हैं। और इस फांस की चुभन सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी शायद महसूस हो रही होगी।
सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, जमीन गबन के मामले में खेल बड़ा हो गया है। पीएमओ ने खुद मेहता से जुड़ी संपत्ति का पूरा कच्चा-चिट्ठा तलब कर लिया है। चर्चा है कि आलाकमान ने भी फडणवीस सरकार से रिपोर्ट मांगी है-आखिर मेहता को इतना संरक्षण क्यों?
पीएम के दोस्त की जमीन: ८१ वर्षीय असगर अली वोरा, जो पीएम नरेंद्र मोदी के स्कूल के साथी हैं, ने आरोप लगाया था कि उनकी २,८१० वर्ग मीटर जमीन पर मेहता से जुड़ी कंपनियों ने कब्जा कर लिया है। पीएम से मुलाकात के ८ दिन के भीतर ही मेहता को मंत्रालय में प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी के सामने बैठक में कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति सरेंडर करने का एलान करना पड़ा। और इसी ने फडणवीस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
मेहता मामले की कई परतें हैं,
उनमें से एक प्रमुख हैं
एक- ४०० करोड़ का स्टांप ड्यूटी घोटाला: मीरा-भायंदर में मेहता की सेवन इलेवन कंपनी पर ४०० से ५०० करोड़ की स्टांप ड्यूटी चोरी, आदिवासी जमीन हड़पने, मैंग्रोव में अवैध क्लब निर्माण और ७९ करोड़ की रॉयल्टी चोरी का आरोप है। खुद भाजपा खेमे के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के २० जून २०२५ के पत्र में तो मेहता का उल्लेख ‘भू-माफिया’ के रूप में है, जिसमें ७ दिन में वसूली के आदेश थे।
मेहता को लेकर राजनीतिक हलकों में तैर रहे हैं तीन तीखे सवाल
राजनीतिक हलकों में तैर रहे हैं तीन तीखे सवाल
१. मेट्रो मंच पर कैमरे वाली चुप्पी: हाल ही में मेट्रो उद्घाटन में मंत्री प्रताप सरनाईक ने खुद कहा था- ‘मीरा-भायंदर की ३० प्रतिशत जमीन मेहता की है, १० प्रतिशत मुझे देने को तैयार हैं’, जिस पर फडणवीस को ‘वैâमरा चालू है’ कहकर रोकना पड़ा था। क्या यह संरक्षण का सार्वजनिक सबूत नहीं था?
२. पीएमओ का सीधा हस्तक्षेप: बताया जा रहा है कि पीएमओ ने सीएम फडणवीस को जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। जब पीएमओ को दखल देना पड़े, तो मतलब हाईकमान का भरोसा डगमगाया है। और इसी के तहत मेहता से संबंधित सभी पुराने मामलों पर रिपोर्ट तलब कर सकते हैं।
३. फडणवीस बनाम मेहता की मजबूरी: मेहता रियल एस्टेट कारोबारी हैं, और मीरा-भायंदर में भाजपा का दागदार चेहरा। विधानसभा चुनाव में उनकी जीत भाजपा के लिए जरूरी है, पर उनके दाग महायुति की छवि पर बट्टा लगा रहे हैं। पहले भी उनके एक अंतरंग वीडियो वायरल होने के बाद काफी बवाल मचा था और उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
विपक्ष उठाएगा मुद्दा
बजट सत्र में विपक्ष इसी फाइल को लेकर हंगामे की तैयारी में है। मेहता के कारनामों से परेशान मीरा-भायंदर की जनता अब विपक्षी नेताओं के कार्यालयों और अखबार के दफ्तरों में फाइलें लेकर पहुंच रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक्शन के बाद ऐसी गतिविधियों में तेजी आई है। अब मेहता भले ही कहें कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है, पर सच्चाई यह है कि जिस जमीन को उन्होंने २०१९ में खरीदा बताया, उसी पर २०१५ में एफआईआर और बॉम्बे हाईकोर्ट में केस लंबित है। अब देखना है, फडणवीस-मेहता को बचाते हैं या पीएमओ-आलाकमान की रिपोर्ट में बलि चढ़ाते हैं।
